सतीश सिंह, अयोध्या. रामनगरी अयोध्या एक बार फिर भक्ति और उत्सव के रंग में रंगने जा रही है. शनिवार से यहां सावन झूला मेला शुरू होगा. 15 से 28 अगस्त तक चलने वाले इस मेले में अयोध्या के मंदिरों में भगवान राम-सीता और अन्य विग्रहों को झूला झुलाने की परंपरा निभाई जाएगी. मेले का मुख्य आकर्षण मणिपर्वत पर होने वाला झूला विहार रहेगा. पहले दिन अयोध्या के अलग-अलग मंदिरों से 11 झांकियां निकाली जाएंगी. ये झांकियां मणिपर्वत पहुंचेंगी, जहां भगवान राम-सीता के झूला विहार के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचने की उम्मीद है.

इस बार झूला मेले में एक खास व्यवस्था की गई है. सुरक्षा कारणों से भगवान झूला बिहारी को पहली बार कुबेर नवरत्न टीला पर ले जाकर झूला विहार कराया जाएगा. यहां पेड़ की डाल पर झूला लगाया गया है. खास बात यह है कि आम श्रद्धालु भी भगवान को झूला झुला सकेंगे. राम मंदिर के अनुष्ठान प्रभारी और मेले के व्यवस्थापक आचार्य इंद्रदेव मिश्र के मुताबिक, अयोध्या में सावन झूला मेले की परंपरा बहुत पुरानी है. सावन शुक्ल तृतीया से शुरू होने वाले इस उत्सव में मंदिरों से भगवान की शोभायात्राएं निकलती हैं और मणिपर्वत पर पहुंचकर झूला विहार का आयोजन होता है.

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5 हजार से ज्यादा मंदिरों में झूलोत्सव

अयोध्या के 5 हजार से अधिक छोटे-बड़े मंदिरों में सावन झूला उत्सव मनाया जाएगा. श्री राम जन्मभूमि, कनक भवन, राजा दशरथ महल, अशर्फी भवन, राम वल्लभा कुंज, रंग महल, जानकी महल, राज सदन और मणिराम दास जी की छावनी समेत प्रमुख मंदिरों में विशेष सजावट और झूला उत्सव देखने को मिलेगा. मान्यता है कि जब रामलला करीब चार महीने के थे, तब सावन के महीने में माता कौशल्या सहित तीनों माताओं ने चारों भाइयों को झूले पर झुलाया था. उन्हें कजरी गीत सुनाए गए. तभी से सावन में भगवान को झूला झुलाने की परंपरा चली आ रही है.

सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने भी कमर कस ली है. मणिपर्वत मेले को एक जोन और पांच सेक्टर में बांटा गया है. पूरे मेला क्षेत्र को छह जोन और 29 सेक्टर में विभाजित किया गया है. पुलिस की ड्यूटी दो पालियों में रहेगी. मेले में अपर पुलिस अधीक्षक से लेकर कांस्टेबल तक बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. महिला पुलिस के साथ पीएसी की 10 कंपनियां, आरएएफ की दो कंपनियां, एटीएस कमांडो और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात रहेंगी. सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी की जाएगी.

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मेले के प्रमुख दिनों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष यातायात व्यवस्था लागू की जाएगी. जरूरत के अनुसार रूट डायवर्जन भी किया जाएगा. पुलिस का फोकस इस बात पर रहेगा कि श्रद्धालुओं को मंदिरों तक पहुंचने में परेशानी न हो और शहर में जाम की स्थिति न बने. एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए उनकी सुरक्षा और सुविधा दोनों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. मेला क्षेत्र में अधिकारी लगातार निगरानी करेंगे.