जींद, संजय कुमार : बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के लिए भूमि अधिग्रहण और राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) मुआवजा नीति के विरोध में सोमवार को जिले के किसानों और भू-स्वामियों ने लघु सचिवालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा के बैनर तले किसानों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए 29 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना को तुरंत वापस लेने की मांग की।

किसानों ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार की नई मुआवजा नीति किसान विरोधी है और इससे किसानों की जमीनों का उचित मूल्य प्रभावित होगा। उनका कहना है कि हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनें खेतों के ऊपर से गुजरने के बाद जमीन की उपयोगिता और बाजार कीमत दोनों घट जाती हैं, लेकिन नई नीति में इस नुकसान को नजरअंदाज किया गया है।

ज्ञापन में किसानों ने कहा कि सरकार ने मुआवजा तय करने की प्रक्रिया में ऐसे बदलाव किए हैं, जिनसे पावरग्रिड, एचवीपीएनएल और निजी ट्रांसमिशन कंपनियों को फायदा मिलेगा। किसानों के मुताबिक नई व्यवस्था में केवल दो वैल्यूएशन रिपोर्टों को लॉटरी सिस्टम के जरिए शामिल किया जाएगा, जिससे जमीन की वास्तविक बाजार दर दब सकती है। साथ ही मार्केट रेट कमेटी की प्रक्रिया में प्रभावित किसानों की भागीदारी भी लगभग खत्म कर दी गई है।

किसानों ने कहा कि पहले की नीति उनके हितों की रक्षा करती थी, जबकि संशोधित नियम पारदर्शिता और निष्पक्षता के खिलाफ हैं। उन्होंने मांग की कि मुआवजा वास्तविक बाजार मूल्य और भविष्य की विकास संभावनाओं को ध्यान में रखकर तय किया जाए। किसानों ने यह भी कहा कि पहले से चल रही परियोजनाओं पर नई नीति लागू करना अनुचित है और इससे किसानों के साथ भेदभाव होगा।

मोर्चा के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अधिसूचना वापस नहीं ली तो पूरे प्रदेश में आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने प्रभावित किसानों और स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक स्वतंत्र समीक्षा समिति गठित करने तथा सभी जिलों में समान मुआवजा नीति लागू करने की मांग की।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान शामिल रहे। किसानों ने सरकार से जल्द समाधान निकालकर किसान हितों की रक्षा करने की अपील की।