रांची। JPSC मेधा घोटाला मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मामले की जांच कर रही CID ने बुधवार को JPSC के पूर्व सदस्य डॉ. जमाल अहमद से लंबी पूछताछ की। पूछताछ में परीक्षा संचालन करने वाली कंपनी TDPL को काम देने, परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी और कथित अनियमितताओं से जुड़े कई अहम सवाल शामिल रहे।
अभय तिवारी के बयान पर आमने-सामने पूछताछ
CID ने डॉ. जमाल से गिरफ्तार आरोपी अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी के बयान में सामने आए आरोपों को लेकर भी सवाल किए। अभय तिवारी ने पूछताछ में डॉ. जमाल से जुड़े कई गंभीर दावे किए थे।हालांकि, डॉ. जमाल अहमद ने इन आरोपों को तथ्यहीन और गलत बताते हुए खारिज कर दिया।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा का जिम्मा कैसे मिला?
पूछताछ के दौरान CID का खास फोकस इस बात पर रहा कि अगर TDPL ब्लैकलिस्टेड थी, तो उसे JPSC की परीक्षा संचालित करने का काम कैसे मिला?जांच एजेंसी ने यह भी जानना चाहा कि कंपनी को काम देने की सिफारिश किस स्तर पर हुई थी और परीक्षा संचालन के दौरान उसकी गतिविधियों की निगरानी किस तरह की गई।
पेपर लीक और OMR में गड़बड़ी पर भी सवाल
CID ने कथित पेपर लीक, OMR शीट में हेराफेरी और परीक्षा के डेटा में बदलाव से जुड़े सवाल भी डॉ. जमाल के सामने रखे।जांच एजेंसी ने पूछा कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में इस तरह की गड़बड़ियां हो रही थीं, तो उन्हें रोकने के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई थी और जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से क्या निगरानी की गई।
अभ्यर्थियों से पैसे लेने का लगाया था आरोप
अभय तिवारी ने CID को दिए बयान में आरोप लगाया था कि डॉ. जमाल अहमद के लिए हजारीबाग के बिचौलियों के माध्यम से अभ्यर्थियों से पैसे वसूले जाते थे। उसने यह भी दावा किया था कि इसकी जानकारी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह को रहती थी।अभय के मुताबिक, इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों के कोड डी-कोड कराने को लेकर भी दबाव बनाया जाता था।
CID कर रही दावों का सत्यापन
डॉ. जमाल ने अभय तिवारी के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अब CID बयानों के साथ-साथ दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर रही है।
बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कुछ बिंदुओं पर CID को संतोषजनक जवाब नहीं मिले हैं। ऐसे में डॉ. जमाल अहमद को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
तीनों सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ
JPSC मेधा घोटाला मामले में CID अब JPSC के तीनों पूर्व सदस्यों से एक-एक कर पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी का फोकस परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, अभ्यर्थियों की सेटिंग और इंटरव्यू प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की कड़ियां जोड़ने पर है।


