प्रयागराज. रायबरेली से सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जुड़े कथित दोहरी नागरिकता (Rahul Gandhi dual citizenship) मामले में नया मोड़ आया है. सुनवाई के बीच जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है. जस्टिस सुभाष विद्यार्थी के मामले से अलग होने का फैसला ऐसे वक्त में आया है जब मामले में याची विग्नेश शिशिर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अलग-अलग पोस्ट्स में कोर्ट पर एकतरफा होने का आरोप लगाया.

पिछले दिनों इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात शुरू हुई थी. इसके बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने अगली तारीख तय कर दी थी. इससे याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. कोर्ट ने बीजेपी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की सोशल मीडिया पोस्ट पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करती हैं और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सुनवाई के बीच जस्टिस विद्यार्थी ने मामले से खुद को अलग कर लिया और केस को आगे की कार्रवाई के लिए दूसरी पीठ के पास भेज दिया.

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न्यायालय ने ये भी उल्लेख किया कि एक अन्य पोस्ट में उन्होंने आम लोगों से अपील की थी कि वे भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश देने को कहें कि आदेश की टाइप कॉपी खुले कोर्ट में पढ़ी जाए. अदालत ने कहा कि ऐसे पोस्ट कोर्ट पर कीचड़ उछालने जैसे हैं. यह भी देखा गया कि शिशिर जनता से यह राय मांग रहे थे कि क्या उन्हें इसी पीठ के सामने मामला जारी रखना चाहिए, जिससे कोर्ट की गरिमा प्रभावित हुई है.

तथ्यों को छुपाने का आरोप

बता दें कि याचिकाकर्ता ने राहुल पर आरोप लगाया था कि साल 2003 से 2009 के बीच इस कंपनी के दस्तावेजों में राहुल गांधी को ‘ब्रिटिश नागरिक’ दिखाया गया था. याचिकाकर्ता का दावा है कि राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटिश नागरिक घोषित किया था और वहां का पासपोर्ट या कानूनी दर्जा हासिल किया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में दावा किया गया था कि राहुल गांधी ने विदेशी नागरिकता के तथ्यों को छुपाया है.