राकेश कथूरिया, कैथल। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजय कुमार, आईपीएस के दिशा-निर्देशों तथा संयुक्त पुलिस आयुक्त, फरीदाबाद एवं ब्यूरो के पुलिस उप-महानिरीक्षक राजेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस के मार्गदर्शन में प्रदेशभर में नशे के विरुद्ध व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में राजकीय बहुतकनीकी संस्थान कैथल में नशे के खिलाफ एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में संस्थान के प्रधानाचार्य कुलबीर सिंह अहलावत और सत्यवान ढाका ने विशेष भूमिका निभाई। कार्यक्रम में 850 विद्यार्थियों और 51 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जागरूकता कार्यक्रम एवं पुनर्वास प्रभारी तथा उप निरीक्षक डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने विद्यार्थियों को सरल और संवादात्मक तरीके से नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी।

नशा सोच, स्वास्थ्य और भविष्य को करता है प्रभावित

डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने युवाओं को समझाया कि नशा व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता, स्वास्थ्य, पढ़ाई, कौशल, रोजगार और भविष्य को प्रभावित करता है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को परिचर्चा में सहभागी बनाते हुए नशे की शुरुआत के कारणों और इससे बचने के उपायों पर संवाद किया।

उन्होंने बताया कि कई बार नशे की शुरुआत केवल जिज्ञासा, बुरी संगति या मित्रों के दबाव में आकर होती है। शुरुआत में व्यक्ति इसे सामान्य समझता है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत उसके जीवन पर नियंत्रण करने लगती है और भविष्य को अंधकारमय बना देती है।

युवाओं को शिक्षा, खेल और रचनात्मक कार्यों से जुड़ने का संदेश

डॉ. वर्मा ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्हें अपनी ऊर्जा नशे में नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल विकास, खेल, रोजगार, सामाजिक सेवा और रचनात्मक कार्यों में लगानी चाहिए।

भावनात्मक संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “नशा होता अच्छा तो मां कहती—खा ले मेरे बच्चा।” उन्होंने कहा कि कोई भी मां अपने बच्चे को नशे में नहीं देखना चाहती। इसलिए युवाओं को अपने माता-पिता की उम्मीदों और अपने उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए नशे से हमेशा दूर रहना चाहिए।

प्रवर्तन, जागरूकता और पुनर्वास पर काम कर रहा ब्यूरो

डॉ. वर्मा ने बताया कि हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो नशे के खिलाफ प्रवर्तन, जागरूकता तथा उपचार एवं पुनर्वास के तीन प्रमुख स्तरों पर काम कर रहा है। नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ विद्यार्थियों और आमजन को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि नशे की लत से पीड़ित लोगों को समाज से अलग करने के बजाय उनके उपचार और पुनर्वास में परिवार तथा समाज को सहयोग करना चाहिए। समय पर उपचार, उचित मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से नशे की गिरफ्त में आया व्यक्ति भी सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सकता है।

कविता के माध्यम से युवाओं को दिया संदेश

डॉ. वर्मा ने कविता के माध्यम से भी युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “चल नशेड़ी नशा छोड़ दे, है यह बुरी बीमारी, एक बार जो लत पड़ जाए, जीवन हो जाए भारी।”

उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि यदि कहीं नशीले पदार्थों की बिक्री, तस्करी अथवा अन्य संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिले तो हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की हेल्पलाइन 90508-91508 अथवा राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन 1933 पर सूचना दें। उन्होंने बताया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती है।

कार्यक्रम के अंत में युवाओं ने नशे से स्वयं दूर रहने तथा अपने साथियों, परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।

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