रांची। झारखंड कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर सरकारी कार्यक्रमों और विद्यालयों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को ही अनिवार्य किए जाने की मांग की है। उन्होंने कर्नाटक और केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में सरकारी आयोजनों और स्कूलों में शुरुआती दो छंदों के गायन को अनिवार्य किए जाने का प्रावधान किया गया है।
छह छंदों को अनिवार्य करने पर उठाए सवाल
प्रदीप यादव ने अपने पत्र में केंद्र सरकार के उस कथित निर्णय पर सवाल उठाया है, जिसके तहत ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों के गायन को अनिवार्य किए जाने की बात कही गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले के पीछे राजनीतिक स्वार्थ है और यह देश की बहुधार्मिक जनभावनाओं के अनुरूप नहीं है।
शुरुआती दो छंदों को बताया सर्वसमावेशी
कांग्रेस विधायक दल के नेता ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंद मुख्य रूप से मातृभूमि की प्राकृतिक सुंदरता और उसकी समृद्धि का वर्णन करते हैं। उनके अनुसार, इनमें किसी विशिष्ट धार्मिक प्रतीक का उल्लेख नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि इन छंदों में भारत की भौगोलिक और प्राकृतिक संपन्नता का गुणगान है, इसलिए इन्हें सभी धर्मों के लोग सहजता से एक साथ गा सकते हैं।
संविधान सभा से जुड़ा इतिहास भी पत्र में किया उल्लेख
प्रदीप यादव ने पत्र में ‘वंदे मातरम’ से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी की सलाह के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल की समिति ने इसके शुरुआती दो छंदों को स्वीकार किया था। उन्होंने आगे कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय गीत घोषित किया था।
SIR की अवधि बढ़ाने के फैसले का कांग्रेस ने किया स्वागत
वहीं, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अवधि बढ़ाए जाने के चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया है। कांग्रेस की ओर से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार को ज्ञापन सौंपकर पुनरीक्षण की अवधि एक माह बढ़ाने की मांग की गई थी।
15 दिन बढ़ी दावा-आपत्ति की अवधि
चुनाव आयोग ने अब मतदाता सूची में दावा और आपत्ति दर्ज कराने की समयसीमा 15 दिन बढ़ाने का फैसला लिया है। कांग्रेस महासचिव लालकिशोर नाथ शाहदेव और सूर्यकांत शुक्ला ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम अब तक छूट गए हैं, वे बढ़ी हुई अवधि का लाभ उठाकर अपना नाम जुड़वाने या आवश्यक सुधार कराने की प्रक्रिया पूरी करें। हालांकि, पार्टी ने अवधि में एक महीने की बढ़ोतरी की मांग की थी।



