चंडीगढ़। करोड़ों के घोटाले और फंड डायवर्जन के आरोपों में घिरे रॉयल एस्टेट ग्रुप (जीरकपुर) और रॉयल सिटी प्रमोटर्स के निदेशकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ईडी की जोन-1 टीम ने लंबी फरारी के बाद गिरफ्तार परवीन कंसल और नीरज कंसल को मोहाली की विशेष अदालत में पेश किया। ईडी ने दोनों भाइयों की 14 दिन की कस्टडी मांगी थी, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 7 दिन का रिमांड मंजूर किया।
अब आरोपी 5 जून तक ईडी की कस्टडी में रहेंगे।
अदालत में सुनवाई के दौरान ईडी के विशेष वकील ने खुलासा किया कि कंसल बंधुओं का नेटवर्क सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है, उनके खिलाफ दिल्ली में सेना से जुड़े प्रोजेक्ट में भी कथित वित्तीय धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज है।
ईडी ने दलील दी कि पंजाब और दिल्ली, दोनों मामलों के तार आपस में जुड़े हो सकते हैं। बड़े सिंडिकेट के ‘मनी ट्रेल’ (लेन-देन के रास्ते) को खंगालने और फर्जी कंपनियों (शेल कंपनियों) के जरिए डायवर्ट की राशि का पता लगाने के लिए आरोपियों से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ बेहद जरूरी है।
32.67 करोड़ का चेक बाउंस…
पूरा मामला तब गर्माया जब पंजाब पुलिस और विजिलेंस ने कंसल बंधुओं और उनकी कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मामले दर्ज किए। गमाडा को दिए गए 32.67 करोड़ के चेक बाउंस हो गए थे। इसके अलावा होमबायर्स (घर खरीदार) और निवेशकों से प्रोजेक्ट के नाम पर जुटाए करोड़ों को मुख्य बिजनेस में लगाने के बजाय शेल कंपनियों के जरिए दूसरी जगहों पर डायवर्ट कर दिया गया। इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली थी।
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