चंडीगढ़: कांवड़ यात्रा को लेकर दोस्तों के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेने गया 12वीं कक्षा का छात्र कुणाल घर लौटते समय दर्दनाक सड़क हादसे का शिकार हो गया। शामली के पास ट्रक ने उसकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। हादसे में कुणाल की मौत हो गई, जबकि उसके साथ बाइक पर सवार अक्षय घायल हो गया। जिस यात्रा को लेकर कुणाल बेहद उत्साहित था, वही उसकी जिंदगी की आखिरी यात्रा बन गई।

दोस्तों के साथ हरिद्वार गया था कुणाल

कुणाल को कांवड़ यात्रा का खासा उत्साह था। उसके साथियों के मुताबिक पिछले साल भी वह डाक कांवड़ लाने के लिए आधे रास्ते तक पहुंच गया था। इस बार शुरुआत में उसने कांवड़ लाने से मना किया था, लेकिन बाद में दोस्तों के साथ हरिद्वार जाने का फैसला किया।

कुणाल के साथी मोनू ने बताया कि वह अन्य साथियों के साथ 6 अगस्त को हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे। कुणाल एक दिन बाद अपने दोस्त अक्षय के साथ बाइक पर हरिद्वार पहुंचा। सभी ने हरिद्वार से गंगाजल लिया और 10 अगस्त की रात डाक कांवड़ लेकर वापस लौटने के लिए रवाना हुए।

मुजफ्फरनगर तक साथ रहे, फिर अलग हो गए साथी

रास्ते में कुछ समय तक सभी साथी एक साथ चल रहे थे। रात करीब दो बजे तक वे मुजफ्फरनगर तक साथ रहे। इसके बाद सभी अलग-अलग हो गए। बाद में साथियों को पता चला कि कुणाल और अक्षय पीछे रह गए हैं।
बताया गया कि दोनों रास्ते में कुछ देर सुस्ताने के लिए रुक गए थे। इसी वजह से वे बाकी साथियों से अलग हो गए। इसके बाद शामली के पास उनकी बाइक को ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में कुणाल की मौत हो गई, जबकि अक्षय घायल हो गया।

हादसे की खबर सुनकर स्तब्ध रह गए दोस्त

कुणाल की मौत की खबर मिलते ही उसके साथी स्तब्ध रह गए। कुछ घंटे पहले जिस दोस्त के साथ वे कांवड़ यात्रा पर निकले थे, उसके अचानक दुनिया से चले जाने की खबर ने सभी को झकझोर दिया। कुणाल के साथ हरिद्वार से लाया गया गंगाजल बाद में यमुना घाट स्थित मंदिर में चढ़ा दिया गया।

परिवार का सबसे छोटा और दुलारा था कुणाल

कुणाल की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है। 12वीं कक्षा में पढ़ रहे कुणाल के माता-पिता उसके बेहतर भविष्य के सपने देख रहे थे। घर में सबसे छोटा होने के कारण वह सभी का दुलारा था और बहनों का भी उसके प्रति खास स्नेह था।
कांवड़ यात्रा के लिए उत्साह के साथ घर से निकला कुणाल वापस तो आया, लेकिन जिंदगी लेकर नहीं। एक सड़क हादसे ने परिवार के उस चिराग को हमेशा के लिए बुझा दिया, जिसके भविष्य को लेकर परिवार ने न जाने कितने सपने संजो रखे थे।