कासगंज. स्कूल की फीस जमा नहीं होने और नाम कटने के डर से घर छोड़कर निकली 16 वर्षीय किशोरी के लिए कासगंज पुलिस मददगार बनकर सामने आई. गाजीपुर जिले के जलालाबाद से कासगंज पहुंची किशोरी को पुलिस ने सकुशल बरामद कर परिजनों से मिलाया. पूछताछ में परिवार की आर्थिक तंगी और बेटियों की पढ़ाई में आ रही मुश्किलों का पता चला तो पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए आर्थिक मदद जुटाई. सभी के सहयोग से कुल 60,200 रुपये एकत्र कर परिवार को सौंपे गए, ताकि आर्थिक परेशानियों के कारण बच्चियों की पढ़ाई न रुके.
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फीस की चिंता में घर छोड़कर निकली किशोरी
मामला गाजीपुर जिले के दुल्लापुर थाना क्षेत्र के जलालाबाद का है. किशोरी एक निजी स्कूल में पढ़ती है. उसके पिता ट्रैक्टर पर मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. परिवार के पास खेती की जमीन भी नहीं है. किशोरी की मां के मुताबिक, परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है. चारों बेटियों की फीस के लिए कुल 11 हजार रुपये जमा करने थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पूरे पैसे का इंतजाम नहीं हो पा रहा था.
नाम कटने के डर से बढ़ गई परेशानी
किशोरी को चिंता सताने लगी कि फीस जमा नहीं हुई तो स्कूल से उसका नाम काट दिया जाएगा. मां ने उसे भरोसा दिलाया कि पैसे जुटाकर फीस जमा कर दी जाएगी, लेकिन भविष्य की चिंता और नाराजगी के बीच वह घर से निकल गई और कासगंज पहुंच गई.
पुलिस ने परिवार से मिलाया
कासगंज शहर कोतवाली प्रभारी जगदीश चंद्र के मुताबिक, शनिवार शाम करीब 8:30 बजे किशोरी के संबंध में सूचना मिली. इसके बाद कोतवाली पुलिस, पीआरवी और मिशन शक्ति टीम ने कार्रवाई की. पूछताछ में किशोरी ने अपना पता गाजीपुर जिले के जलालाबाद में बताया. पुलिस ने उसे वन स्टॉप सेंटर भेजा और गाजीपुर पुलिस की मदद से परिजनों से संपर्क किया. बाद में मां और भाई कासगंज पहुंचे, जहां किशोरी को सकुशल उनके सुपुर्द कर दिया गया.
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पुलिस और स्थानीय लोगों ने पेश की मिसाल
परिवार की आर्थिक स्थिति जानने के बाद कासगंज पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने स्वेच्छा से मदद के लिए हाथ बढ़ाया. सभी के सहयोग से 60,200 रुपये जुटाकर परिवार को सौंपे गए. इस पहल ने पुलिस की संवेदनशील और मानवीय भूमिका को सामने रखा. यह मदद परिवार के लिए आर्थिक सहारे के साथ बेटियों की पढ़ाई जारी रखने की उम्मीद भी बनी.

