Dharm Desk – रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन सीधे अपने भाई को राखी बांधने से पहले देवताओं का आर्शीवाद लेना बहुत शुभ और कल्याण कारी माना जाता है। सही विधि-विधान से बांधी गई राखी भाई-बहन के जीवन में सुख समृद्धि और सुरक्षा लाती है।

राखी बांधने का सही क्रम और विधि
- पहली राखी गणेशजी को अर्पित करें – रक्षाबंधन पर सभी बहनों को सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश को राखी अर्पित करनी चाहिए। इससे जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं।
- दूसरी राखी भगवान कृष्ण को अर्पित करें – गणेश जी के बाद भगवान श्रीकृष्ण को राखी बांधें या उनके समक्ष अर्पित करें। श्री कृष्ण को रक्षा का सर्वोपरि रक्षक माना गया है।
- भाई को राखी बांधने का क्रम – देवताओं को राखी अर्पित करने के बाद ही कलाई पर राखी सजवाने के लिए भाई को बैठाएं और रक्षासूत्र बांधें।
- लाल कपड़े और अक्षत चावल की पोटली – एक लाल रंग के कपड़े में रोली लगे हुए चावल रखें और उसकी एक पोटली बना लें। राखी बांधते समय यह पोटली भाई के हाथ में पकड़ा दें।
- पोटली और राखी के धागे में लगाएं तीन गांठे – लाल कपड़े की पोटली बनाते समय और भाई की कलाई पर राखी बांधते समय ध्यान रखें कि धागे में तीन गांठें जरूर लगाई जाएं। ये तीन गांठें त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश की प्रतीक मानी जाती हैं।
- पूजा के बाद पोटली को मंदिर में रखें – राखी बंधवाने के बाद भाई उस लाल कपड़े की पोटली को अपने घर के मंदिर या पूजा स्थान में सुरक्षित रख दे।
इस विधि का धार्मिक फल
यदि रक्षाबंधन के दिन इस विशेष विधि-विधान का पालन किया जाए और त्रिदेवों के नाम की तीन गांठें बांधकर रक्षासूत्र बांधा जाए तो इसका फल केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं रहता। इस उपाय से बहन के मायके और ससुराल दोनों ही पक्षों में अपार खुशहाली सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
इसके साथ ही राखी बांधते समय भाई-बहन को मन में एक-दूसरे के सुख अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि शुभ भावना और श्रद्धा के साथ किया गया यह पर्व पारिवारिक रिश्तों में प्रेम और अपनापन बढ़ाता है। इसलिए रक्षा बंधन के दिन विधि से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा सम्मान और भाई-बहन के बीच स्नेह की भावना को माना जाता है।


