भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और त्रिपुरा के नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा की। पार्टी ने सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली, अर्चना गुप्ता को हरियाणा, अभिषेक देबराय को त्रिपुरा और केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है।

इन नियुक्तियों को बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व की नई रणनीति और संगठन विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है।

कौन हैं केवल सिंह ढिल्लों?

पंजाब बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों का जन्म बरनाला जिले के तल्लेवाल गांव में हुआ था। वह पंजाब की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और मालवा क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती होती है। ढिल्लों 2007 से 2017 तक बरनाला विधानसभा सीट से विधायक रहे।

हालांकि, 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें आम आदमी पार्टी के नेता गुरमीत सिंह मीत हेयर से हार का सामना करना पड़ा था।

कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर

केवल सिंह ढिल्लों पहले कांग्रेस पार्टी में थे और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता रहा है। पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने कई अन्य पूर्व कांग्रेस नेताओं के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया था।

बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें पंजाब बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया और संगठन में अहम जिम्मेदारी सौंपी। अब प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी को उनसे बड़ी राजनीतिक उम्मीदें हैं।

मालवा में बीजेपी को मजबूत करने की तैयारी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति के जरिए बीजेपी पंजाब के मालवा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। मालवा क्षेत्र में जाट सिख राजनीति का खास प्रभाव माना जाता है और ढिल्लों वहां मजबूत जनाधार रखने वाले नेता माने जाते हैं।

अकाली दल से अलग होने के बाद बीजेपी लगातार पंजाब में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण तैयार करने में जुटी हुई है। ऐसे में केवल सिंह ढिल्लों की ताजपोशी को पार्टी की नई राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

75 साल की उम्र में मिली बड़ी जिम्मेदारी

75 वर्षीय केवल सिंह ढिल्लों जून 2022 से बीजेपी में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर काम करने के बाद अब उन्हें पंजाब बीजेपी की कमान सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके अनुभव और संगठनात्मक पकड़ से पंजाब में बीजेपी को मजबूती मिलेगी।