अमित पाण्डेय, खैरागढ़। जिस बस स्टैंड को यात्रियों की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों से लैस बताया जाता है, वहां शनिवार देर रात चोरों ने ऐसी वारदात को अंजाम दिया, जिसने पूरी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। नया बस स्टैंड परिसर में खड़ी पांच यात्री बसों से करीब 300 लीटर डीजल चोरी कर लिया गया और पूरी घटना कैमरों में कैद होने के बावजूद चोर आराम से फरार हो गए।

विडंबना यह है कि चोरी कोई जेबकतरी या कुछ मिनटों में होने वाली घटना नहीं थी। आरोपियों ने एक-एक बस के टैंक के ताले तोड़े, गैलनों में डीजल भरा और करीब आधे घंटे तक पूरे इत्मीनान से काम करते रहे। सवाल यह है कि यदि इतनी लंबी वारदात के दौरान किसी सुरक्षा कर्मी, गश्ती दल या जिम्मेदार अधिकारी को भनक तक नहीं लगी, तो फिर कैमरे और सुरक्षा व्यवस्था आखिर किस काम की है?

डीजल चोरी की वारदात CCTV कैमरे में कैद
सीसीटीवी फुटेज के अनुसार रात करीब 2 बजे एक सफेद स्कॉर्पियो बस स्टैंड पहुंची। वाहन से उतरे युवक सीधे बसों के पास पहुंचे और डीजल निकालना शुरू कर दिया। फुटेज से साफ है कि आरोपियों को न तो किसी रोक-टोक का डर था और न ही पकड़े जाने की चिंता। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें परिसर की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी थी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना को केवल डीजल चोरी तक सीमित मानना बड़ी भूल होगी। यह मामला सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा, बस स्टैंड प्रबंधन और रात्रिकालीन निगरानी व्यवस्था की गंभीर विफलता को भी उजागर करता है। यदि चोर पांच बसों के टैंक खाली कर सकते हैं, तो भविष्य में किसी बड़ी आपराधिक घटना की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

बस संचालकों का कहना है कि बस स्टैंड परिसर में रात के समय असामाजिक तत्वों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। अक्सर बसों में शराब की बोतलें, डिस्पोजेबल ग्लास और अन्य सामान मिलते हैं। शिकायतें पहले भी होती रही हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का नतीजा अब संगठित चोरी के रूप में सामने आया है। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ डीजल की मांग बढ़ी हुई है। ऐसे समय में 300 लीटर डीजल की चोरी सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। यह आशंका भी जताई जा रही है कि चोरी किया गया डीजल किसी संगठित नेटवर्क के माध्यम से खपाने की कोशिश की जा सकती है।
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी है और स्कॉर्पियो सवार युवकों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल आरोपियों की गिरफ्तारी से भी आगे का है। जब बस स्टैंड में कैमरे मौजूद थे, तब निगरानी कौन कर रहा था? रात की सुरक्षा व्यवस्था किसके भरोसे थी? और आखिर चोरों को इतना आत्मविश्वास कहां से मिला कि वे आधे घंटे तक डीजल भरते रहे और किसी ने रोकने की कोशिश तक नहीं की?
खैरागढ़ में चर्चा सिर्फ डीजल चोरी की नहीं, बल्कि उस सुरक्षा व्यवस्था की भी है, जो कागजों में मौजूद दिखती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर नजर नहीं आती।
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