अमित पाण्डेय, खैरागढ़। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों को गैस सिलेंडर वितरण में कथित अनियमितता और ओटीपी के जरिए फर्जी डिलीवरी दर्ज किए जाने के आरोपों को लेकर लल्लूराम डॉट कॉम में प्रमुखता से प्रकाशित खबर का बड़ा असर हुआ है। लगातार खबरें सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर कराई गई जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर साल्हेकला इंडियन ग्रामीण वितरक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।

गौरतलब है कि बाजार आतरिया क्षेत्र स्थित साल्हेकला इंडियन ग्रामीण वितरक के खिलाफ बड़ी संख्या में ग्रामीण उपभोक्ताओं ने शिकायतें की थीं। उपभोक्ताओं का आरोप था कि गैस वितरण से पहले उनके मोबाइल पर आए ओटीपी लिए जाते हैं और सिस्टम में सिलेंडर की डिलीवरी दर्ज कर दी जाती है, जबकि कई मामलों में गैस सिलेंडर समय पर उपभोक्ताओं तक पहुंचता ही नहीं था। इसके बावजूद रिकॉर्ड में वितरण पूरा दिखने के कारण उपभोक्ताओं के खातों में सब्सिडी की राशि भी पहुंच जाती थी।
मामले को लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से उठाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई। जांच के दौरान साल्हेकला इंडियन ग्रामीण वितरक द्वारा द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) प्रदाय एवं वितरण विनियमन आदेश, 2000 के उल्लंघन की पुष्टि हुई। इसके आधार पर एजेंसी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
जांच में सामने आई अनियमितताएं
प्रशासनिक जांच में गैस वितरण प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन के तथ्य सामने आने के बाद संबंधित एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही मामले में आगे की कार्रवाई के लिए तेल उद्योग के राज्य स्तरीय समन्वयक को भी पत्र भेजा गया है।
क्या था पूरा मामला?
ग्रामीण उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया था कि एजेंसी कर्मचारी गैस सिलेंडर की वास्तविक डिलीवरी से पहले ही उपभोक्ताओं से ओटीपी प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद सिस्टम में सिलेंडर वितरित दिखा दिया जाता था, जबकि कई उपभोक्ताओं को कई दिनों तक गैस सिलेंडर नहीं मिलता था। कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी दावा किया था कि उनके खातों में दो-दो और तीन-तीन बार सब्सिडी की राशि पहुंची, लेकिन संबंधित सिलेंडर कभी उनके घर तक नहीं पहुंचे।

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब उपभोक्ताओं ने घरेलू गैस सिलेंडरों के कथित रूप से व्यावसायिक उपयोग में खपाए जाने की आशंका जताई। स्थानीय लोगों का दावा था कि इस कथित गड़बड़ी से सैकड़ों परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
गरीब हितग्राहियों से जुड़ा है मामला
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने और धुएं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की थी। ऐसे में गैस वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता का सीधा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है।
खबर से जांच और जांच से कार्रवाई तक
लल्लूराम डॉट कॉम में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक जांच कराई गई और अब प्रकरण दर्ज होने से यह स्पष्ट हो गया है कि मामले में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। जिन शिकायतों को शुरुआत में केवल उपभोक्ताओं की नाराजगी माना जा रहा था, वे अब जांच में नियम उल्लंघन के रूप में सामने आ चुकी हैं।
फिलहाल लोगों की नजर आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच में और क्या तथ्य सामने आते हैं तथा जिम्मेदार लोगों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। खैरागढ़ का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि जब जनहित के मुद्दों को तथ्य और प्रमाणों के साथ मजबूती से उठाया जाता है तो प्रशासन को कार्रवाई के लिए आगे आना पड़ता है और शिकायतें आखिरकार कानूनी कार्रवाई तक पहुंचती हैं।
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