टोरंटो से मुंबई जा रहे एयर इंडिया के विमान फ्लाइट 182 – ‘सम्राट कनिष्क’ में 23 जून 1985 को बम धमाका हुआ था, वह बोइंग 747 विमान था. इस धमाके में जिसमें सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी. कनाडाई सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने 41 साल बाद कबूला है कि बम ब्लास्ट में खालिस्तानी आतंकवादियों का हाथ था. कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने इस घटना को ‘जघन्य आतंकवादी काम’ बताया है.
टोरंटो से मुंबई जा रहे एयर इंडिया के जिस विमान में 1985 में बम धमाका हुआ था, उसे लेकर कनाडा ने अब मान लिया है कि ये धमाका खालिस्तानी आतंकियों ने करवाया था.
एयर इंडिया के विमान फ्लाइट 182 – ‘सम्राट कनिष्क’ में धमाका आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर हुआ था. आयरलैंड के हवाई क्षेत्र में लगभग 9,400 मीटर की ऊंचाई पर बम विस्फोट के कारण विमान अटलांटिक महासागर में गिर गया. इस हादसे में कुल 329 लोगों की मौत हुई थी.

इस ब्लास्ट के बाद कनाडा 23 जून को राष्ट्रीय आतंकवाद पीड़ित स्मरण दिवस के रूप में मनाता आया है. 23 जून को इस घटना के 41 साल पूरे होने पर CSIS ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी.

इस विमान धमाका में ज्यादातर लोग भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे. इनमें 268 कनाडाई नागरिक और 24 लोग भारत के नागरिक थे. लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास धमाका होने के बाद विमान अटलांटिक महासागर में ही टूटकर विलीन हो गया और साथ ही सवार सभी लोगों की मौत हो गई.
भारत का हमेशा से ही स्टैंड रहा है कि यह धमाका कनाडा से काम कर रहे खालिस्तानी आतंकियों ने करवाया था. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया है.
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