आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली की रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) सरकार पर 22 हजार करोड़ रुपये के कथित चावल घोटाले का आरोप लगाया है। पार्टी ने इस मामले को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bhardwaj) ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि सरकारी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे हजारों करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका पैदा हुई है। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता संजीव झा (Sanjeev Jha) और कुलदीप कुमार (Kuldeep Kumar) भी मौजूद रहे।

दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने AAP के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सिरसा ने आरोपों को झूठा और भ्रामक बताते हुए कहा कि सौरभ भारद्वाज को अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोप वापस नहीं लिए गए तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सिरसा ने कहा कि सरकार की छवि खराब करने के उद्देश्य से लगाए गए निराधार आरोपों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर मामला अदालत तक ले जाया जाएगा। उन्होंने सौरभ भारद्वाज से अपने दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण पेश करने की भी मांग की।

मंत्री सिरसा ने AAP नेताओं को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

AAP द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कड़ा रुख अपनाते हुए पार्टी नेताओं सौरभ भारद्वाज और संजीव झा को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि दिल्ली सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपये के कथित चावल घोटाले की योजना बनाई थी, जिसे 3 वर्षों तक चलाया जाना था। उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में आंकड़े भी पेश किए और पूरे मामले की जांच की मांग की।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, “सौरभ भारद्वाज और संजीव झा ने आज एक बार फिर मेरे खिलाफ बेबुनियाद, झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए हैं। इससे साफ पता चलता है कि वे मुझे बदनाम करना चाहते हैं और मेरी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह ईर्ष्या से भरा अभियान चलाना उनका तरीका हो सकता है, लेकिन अब बहुत हो चुका है।”

सिरसा ने आगे कहा कि वह सौरभ भारद्वाज और संजीव झा को इन आरोपों को वापस लेने के लिए 24 घंटे का समय दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर आरोप वापस नहीं लिए गए तो वह उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने और अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे। सार्वजनिक जीवन में बिना सबूत किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती और ऐसे आरोप लगाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

क्या आरोप लगाए सौरभ ने?

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज का दावा है कि यह मामला गरीबों के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाले सब्सिडी वाले चावल के उपयोग से जुड़ा है। सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो संदेश में कहा कि दिल्ली में एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसकी रकम सुनकर लोगों के होश उड़ जाएंगे। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के माध्यम से राज्य सरकारों को बेहद रियायती दर पर चावल उपलब्ध कराया जाता है। यह चावल उन गरीब, प्रवासी और दिहाड़ी मजदूर परिवारों के लिए होता है, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और जिन्हें सरकारी योजनाओं के तहत खाद्यान्न सहायता दी जाती है।

AAP ने मंत्री सिरसा के विभाग पर साधा निशाना

AAP नेता का आरोप है कि दिल्ली सरकार ने इस चावल को सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के बजाय पूर्वोत्तर भारत की एक कॉर्पोरेशन को देने की योजना बनाई। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है और इसी वजह से उन्होंने इसे 22 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले का नाम दिया है। भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार गरीबों के हित में राज्यों को सब्सिडी पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती है ताकि उसे राशन के रूप में पात्र लोगों में वितरित किया जा सके। उनका आरोप है कि इस उद्देश्य से मिले चावल का उपयोग निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं किया गया।

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि गरीबों के लिए मिलने वाले सब्सिडी वाले चावल को एक बाहरी एजेंसी के जरिए निजी कंपनियों तक पहुंचाकर भारी मुनाफा कमाने की योजना बनाई गई थी। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार ने कथित तौर पर असम की एक कॉर्पोरेशन के पक्ष में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) को पत्र लिखकर हर सप्ताह 31 हजार मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराने की सिफारिश की थी। उनके अनुसार, यह चावल गरीबों, प्रवासी मजदूरों और राशन कार्ड से वंचित जरूरतमंद लोगों के लिए सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जाता है।

AAP नेता का दावा है कि इस व्यवस्था के तहत कई सप्ताह तक चावल की आपूर्ति जारी रही, लेकिन बाद में केंद्र सरकार के सतर्कता विभाग (विजिलेंस) ने मामले को पकड़ लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 31 हजार मीट्रिक टन चावल की साप्ताहिक आपूर्ति का मूल्य करीब 143 करोड़ रुपये बैठता है और इस प्रक्रिया से हर सप्ताह लगभग 70 करोड़ रुपये का लाभ कमाया जा रहा था। भारद्वाज ने कहा कि यदि यह व्यवस्था तीन वर्षों तक चलती रहती तो कथित घोटाले का आकार 22 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सब्सिडी पर खरीदे गए चावल को दिल्ली के गरीबों में वितरित करने के बजाय हरियाणा की एक निजी कंपनी को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। AAP ने इस मामले में सीधे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह विभाग दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के पास है और विभाग की ओर से ही FCI को संबंधित पत्र भेजा गया था।

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