चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने राज्य के सभी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में ‘खेल पिटारा’ नामक खेल-आधारित शिक्षण किट उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा को अधिक रोचक, आनंददायक और प्रभावी बनाना है। इस योजना पर लगभग 9.3 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे फाउंडेशनल स्टेज में पढ़ रहे करीब 7.5 लाख बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा।
यह पहल नर्सरी से दूसरी कक्षा तक की पढ़ाई को बाल-केंद्रित और गतिविधि-आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का मानना है कि प्रारंभिक वर्षों में मजबूत शैक्षणिक नींव ही भविष्य की सफलता, आत्मविश्वास और बौद्धिक विकास का आधार बनती है। 3 से 8 वर्ष के बच्चों में किया गया निवेश आने वाले वर्षों में राज्य के समग्र विकास में सहायक होगा।
‘खेल पिटारा’ एक समग्र लर्निंग-टीचिंग मटेरियल किट है, जिसे छोटे बच्चों के संपूर्ण विकास को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह पारंपरिक रटने की पद्धति से हटकर खेल, कहानी, गतिविधि और सहभागिता के माध्यम से सीखने को बढ़ावा देती है। इससे बच्चे सहज और स्वाभाविक तरीके से ज्ञान अर्जित कर सकेंगे।
किट में आयु-आधारित सामग्री शामिल है, जैसे—खिलौने और मैनिपुलेटिव्स, पहेलियां, स्टोरी कार्ड, फ्लैश कार्ड, पोस्टर, गतिविधि पुस्तिकाएं, कठपुतलियां और शिक्षकों के लिए संसाधन सामग्री। यह सामग्री भाषा कौशल, बुनियादी साक्षरता, गणितीय समझ, रचनात्मकता, समस्या-समाधान क्षमता और सामाजिक-भावनात्मक विकास को सुदृढ़ करेगी। साथ ही, यह प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े तनाव और भय को भी कम करने में सहायक होगी।
राज्य के लगभग 12,856 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में ‘खेल पिटारा’ किटें वितरित की जाएंगी। खरीद प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और वितरण अंतिम चरण में है। 1 अप्रैल तक सभी विद्यालयों में किट पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। फाउंडेशनल स्टेज की कक्षाएं संभालने वाले शिक्षकों को गतिविधि-आधारित शिक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रशिक्षण और संरचित सहयोग भी दिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि शिक्षा में वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत प्रारंभिक स्तर से ही होती है। उन्होंने बताया कि ‘खेल पिटारा’ के माध्यम से बच्चे शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि खोज, रचनात्मकता और आत्मविश्वास निर्माण के अवसर के रूप में अनुभव करेंगे।

यह पहल केवल पाठ्यक्रम सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि रटने-आधारित शिक्षा से हटकर खेल और गतिविधि-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने की सरकार की ठोस प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। प्रारंभिक स्तर पर सीखने की खाई को कम करने और मजबूत शैक्षणिक ढांचा तैयार करने की दिशा में इसे एक दूरदर्शी कदम माना जा रहा.
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