दिल्ली सरकार राजधानी को साफ-सुथरा, हरा-भरा और विश्वस्तरीय शहर बनाने की दिशा में आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रही है। धूल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार जल्द ही DUST Portal 2.0 लॉन्च करने की तैयारी में है। इस संबंध में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) ने शुक्रवार को पोर्टल की प्रगति की समीक्षा की। प्रस्तावित DUST Portal 2.0, DPCC द्वारा विकसित एक उन्नत AI-सक्षम पर्यावरण निगरानी और अनुपालन प्लेटफॉर्म है। इसे विशेष रूप से दिल्ली में धूल प्रदूषण (Dust pollution) की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने और प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी को मजबूत बनाने के लिए तैयार किया गया है।

सरकार का मानना है कि AI आधारित यह प्लेटफॉर्म निर्माण स्थलों, धूल उत्सर्जन वाले क्षेत्रों और प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुपालन की निगरानी को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाएगा। इसके माध्यम से नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों की पहचान तेजी से की जा सकेगी और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित होगी। पर्यावरण मंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को पोर्टल के सभी तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। DUST Portal 2.0 को आने वाले कुछ हफ्तों में लॉन्च किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, यह पोर्टल दिल्ली भर में निर्माण गतिविधियों और पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रियल-टाइम डेटा विश्लेषण, स्वचालित मूल्यांकन प्रणाली, AI-सक्षम कैमरे, पार्टिकुलेट मैटर (PM) सेंसर और डिजिटल गवर्नेंस टूल्स का उपयोग करेगा।

पोर्टल निर्माण स्थलों पर लागू धूल नियंत्रण उपायों की प्रभावी निगरानी भी करेगा। इसमें हाई-डेंसिटी ग्रीन एंटी-डस्ट नेट, एंटी-स्मॉग गन और अन्य प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं के उपयोग और उनकी कार्यक्षमता पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि निर्माण एजेंसियां निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रही हैं या नहीं। इसके अलावा, DUST Portal 2.0 में एक स्वचालित अलर्ट सिस्टम भी होगा। यदि किसी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक पाया जाता है, तो सिस्टम स्वतः अलर्ट जारी करेगा। इससे संबंधित विभागों को तुरंत जानकारी मिलेगी और समय रहते आवश्यक नियंत्रणात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

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DUST पोर्टल 2.0: AI-आधारित

सिरसा ने कहा कि DUST Portal 2.0 दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का एक सशक्त माध्यम साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रदूषण संबंधी डेटा एकत्र करना नहीं, बल्कि नियमों के पालन की जवाबदेही तय करना भी है। मंत्री ने कहा, “हमारा मकसद सिर्फ डेटा इकट्ठा करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करना है। हर कंस्ट्रक्शन साइट को धूल नियंत्रण के नियमों का पालन करना होगा और तकनीक हमें रियल-टाइम में नियमों के उल्लंघन की पहचान करने में मदद करेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि राजधानी में विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन यह लोगों की सेहत की कीमत पर नहीं हो सकते। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि निर्माण गतिविधियों के दौरान पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन हो और धूल प्रदूषण को न्यूनतम रखा जाए। AI आधारित DUST Portal 2.0 पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही तय करने और लापरवाही के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पोर्टल के जरिए निर्माण स्थलों की निगरानी, प्रदूषण स्तर का आकलन और नियमों के उल्लंघन की पहचान रियल-टाइम में की जा सकेगी, जिससे संबंधित एजेंसियां समय रहते कार्रवाई कर सकेंगी।

दिल्ली सरकार का प्रस्तावित DUST Portal 2.0 राजधानी में धूल प्रदूषण की निगरानी और नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करेगा। इस पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में QR कोड आधारित साइट मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल है, जिसके तहत प्रत्येक पंजीकृत निर्माण स्थल को एक विशिष्ट QR कोड दिया जाएगा। इस QR कोड को स्कैन करते ही अधिकारी संबंधित निर्माण स्थल की पूरी जानकारी, पर्यावरणीय नियमों के पालन का रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट और अन्य जरूरी डेटा तुरंत देख सकेंगे। इससे निरीक्षण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनेगी तथा नियमों के अनुपालन की निगरानी आसान होगी।

DUST Portal 2.0 निर्माण स्थलों की 24×7 लाइव मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित करेगा। इसके माध्यम से अधिकारी किसी भी साइट पर धूल नियंत्रण संबंधी निर्देशों के पालन में कमी या लापरवाही का तत्काल पता लगा सकेंगे और समय रहते कार्रवाई शुरू कर पाएंगे। यह प्रणाली PM सेंसर, AI आधारित कैमरों और Continuous Ambient Air Quality Monitoring स्टेशनों के साथ एकीकृत होगी। इसके जरिए विभिन्न निर्माण स्थलों का PM2.5 और PM10 स्तरों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कौन-सी साइटें वायु गुणवत्ता को सबसे अधिक प्रभावित कर रही हैं।

24×7 AI निगरानी से धूल प्रदूषण पर लगाम

इस पोर्टल में AI आधारित अलर्ट सिस्टम की सुविधा भी शामिल की गई है, जो पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी की स्थिति में स्वतः चेतावनी जारी करेगा। पोर्टल के तहत उल्लंघनों को 3 स्तरों में वर्गीकृत किया जाएगा ताकि संबंधित विभाग समय पर और प्रभावी कार्रवाई कर सकें। येलो अलर्ट प्रारंभिक चेतावनी के रूप में कार्य करेगा और वायु गुणवत्ता के निर्धारित सीमा के करीब पहुंचने या उसे पार करने की स्थिति की जानकारी देगा। ऑरेंज अलर्ट ऑडिट आधारित मध्यम स्तर के उल्लंघनों को दर्शाएगा, जबकि रेड अलर्ट गंभीर उल्लंघनों या उच्च प्रदूषण स्तर की स्थिति में जारी किया जाएगा। रेड अलर्ट जारी होने के बाद संबंधित विभागों द्वारा स्वतः कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों और DPCC अधिकारियों के लिए विकसित विशेष डैशबोर्ड का भी प्रदर्शन किया। इन डैशबोर्ड्स के माध्यम से नियमों के अनुपालन की स्थिति, पर्यावरणीय विश्लेषण, अलर्ट प्रबंधन और डिजिटल ऑडिट की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी।

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