राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडौली के बयानों के बाद कुलदीप बिश्नोई ने बीजेपी को खुली चेतावनी दी है। वे चौधरी भजनलाल के सम्मान पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। प्रदेश की राजनीति में चौधरी भजनलाल के परिवार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी घमासान में बदल गया है। हाल ही में राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बडौली की ओर से दिए गए बयानों के बाद कुलदीप बिश्नोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने हरियाणा में भाजपा नेतृत्व को सीधे चुनौती देते हुए कहा है कि यदि उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल के सम्मान से समझौता किया गया, तो पार्टी को ‘अर्श से फर्श’ पर आने में देर नहीं लगेगी।

कुलदीप बिश्नोई का अल्टीमेटम

कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा को अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि वे पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं, लेकिन अपने पिता और जननायक चौधरी भजनलाल का अपमान सहन नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहनलाल बडौली ने सार्वजनिक मंच से चौधरी भजनलाल का नाम लेते समय ‘चौधरी’ या ‘जी’ जैसे सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग नहीं किया, जो उनकी विचारधारा का अपमान है।

कुलदीप विश्नोई का ‘X’ पोस्ट

हरियाणा की राजनीति और विचारधारा पर हमला

इसके साथ ही, रेखा शर्मा द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पणी को भी बिश्नोई ने पूरे हरियाणा की राजनीति और विचारधारा पर हमला बताया है। बिश्नोई ने सत्ता के गणित को याद दिलाते हुए कहा कि हरियाणा में भाजपा सरकार के गठन में उनके और उनके कोर वोटबैंक की अहम भूमिका रही है, जिसे नजरअंदाज करना पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

निशाने पर मोहन लाल बडौली

विवाद का दायरा तब और बढ़ गया जब मोहन लाल बडौली को सीधे निशाने पर लिया गया। विश्नोई ने आरोप लगाया कि एक सार्वजनिक मंच से चौधरी भजनलाल का नाम लेते समय ‘चौधरी’ या ‘जी’ तक नहीं लगाया गया। इसे उन्होंने सीधा अपमान बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक शब्द की कमी नहीं, बल्कि सोच की कमी को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही पार्टी की संस्कृति है, जहां वरिष्ठ नेताओं के सम्मान का भी ध्यान नहीं रखा जाता।

‘संबंधित नेताओं से मंगवाई जाए माफी’

अंत में विश्नोई का लहजा थोड़ा संयमित जरूर दिखा, लेकिन संदेश उतना ही स्पष्ट रहा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि सम्मान और विरासत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने पार्टी से अपेक्षा जताई कि स्थिति को गंभीरता से लिया जाए, संबंधित नेताओं से माफी मंगवाई जाए और भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जाए।

आगे की राह और राजनीतिक प्रभाव

अब सबकी निगाहें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे इस मामले पर क्या कदम उठाते हैं। विश्नोई ने मांग की है कि पार्टी इस मामले को गंभीरता से ले, संबंधित नेताओं से माफी मंगवाए और भविष्य में ऐसे विवादों से बचे। यदि इस मसले का समय पर समाधान नहीं निकला, तो हरियाणा के आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।