गोरखपुर में महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए. उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर और सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की.

गोरखपुर. ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 57वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर और सनातन परंपरा से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि वर्ष 1949 में अयोध्या स्थित श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला का प्राकट्य मंदिर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव था.

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन चुका है. उनके मुताबिक इससे रामद्रोहियों को अयोध्या का वैभव बर्दाश्त नहीं हो रहा है. उन्होंने रामभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों से ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की.

कालनेमि से सावधान रहने की अपील

सीएम योगी ने कहा कि सभी रामभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों को वर्तमान दौर के कालनेमियों से सावधान रहना होगा. उन्होंने कहा कि समाज सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसे लेकर किसी तरह का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए.

उन्होंने अयोध्या के भव्य मंदिर के साथ काशी विश्वनाथ धाम, विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी धाम, प्रयागराज के दिव्य कुंभ और वृंदावन के वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख किया. मुख्यमंत्री के अनुसार सनातन परंपरा से चिढ़ने वाले लोग इन उपलब्धियों को लेकर दुष्प्रचार कर सकते हैं और भ्रम पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं.

मुख्यमंत्री ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे, तब कालनेमि ने छद्म रूप में उन्हें रोकने का प्रयास किया था. हनुमान जी ने उसे पहचान लिया था. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी रामभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों को ऐसे कालनेमियों से सावधान रहना होगा.

पंथ और जाति में भेदभाव नहीं

मुख्यमंत्री ने गोरक्षपीठ को संपूर्ण सनातन के लिए समर्पित पीठ बताते हुए कहा कि यहां किसी पंथ, संप्रदाय, व्यक्ति या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता. उन्होंने कहा कि अलग-अलग पंथों और संप्रदायों की अपनी उपासना पद्धतियां हो सकती हैं, लेकिन सभी के कल्याण का व्यापक आधार सनातन धर्म है.

सीएम योगी ने कहा कि सनातन की किसी भी शाखा से जुड़े व्यक्ति को गोरक्षपीठ में वही सम्मान मिलता है, जो उसे अपनी परंपरा में प्राप्त होता है. उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार करने के लिए सभी पंथों और संप्रदायों से एक भाव, एक स्वर और एक गति के साथ आगे बढ़ने की बात कही.

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि 140 करोड़ भारतीय एक साथ चलने का सामर्थ्य हासिल कर लें तो दुनिया की कोई भी ताकत उनके सामने टिक नहीं पाएगी. वहीं, उन्होंने अलग-अलग स्वर और अलग-अलग गति को दुर्गति का कारण बताया.

संतों के कार्य दूरदर्शी

सीएम योगी ने संतों और महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग केवल अपने वर्तमान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनके कार्य दूरगामी सोच पर आधारित होते हैं.

मुख्यमंत्री ने महंत दिग्विजयनाथ के शिक्षा क्षेत्र में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 95 वर्ष पहले, जब देश गुलाम था और साधन-संसाधनों की कमी थी, तब उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी. उन्होंने शिक्षा के इस प्रकल्प का नाम महाराणा प्रताप के नाम पर रखा, जिन्हें स्वदेश, स्वधर्म और स्वाभिमान के आदर्श से जोड़ा जाता है.

मुख्यमंत्री के अनुसार उत्तर प्रदेश का पहला राज्य विश्वविद्यालय गोरखपुर में बना और महंत दिग्विजयनाथ ने शिक्षा परिषद के दो कॉलेज देकर उसकी नींव मजबूत करने में योगदान दिया. उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ को अपने योगदान का श्रेय लेने की कोई इच्छा नहीं थी.

सीएम योगी ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ का मानना था कि गोरक्षपीठ हिंदू और लोक कल्याण की पीठ है और इसकी संपत्ति का उपयोग लोकोपयोगी कार्यों के लिए ही होना चाहिए.