सुरेश पांडेय, सिंगरौली। मध्यप्रदेश के सिंगरौली में पदस्थ श्रम निरीक्षक नवनीत पाण्डेय गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम से एक फर्म संचालित कराई और उस फर्म के स्थायी पते के रूप में सरकारी आवास का उपयोग किया। इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि इसी फर्म के माध्यम से पीआईयू (PIU), नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (PWD) सहित कई सरकारी विभागों के टेंडर लेकर कार्य किए गए। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सरकारी सेवा नियमों, आचरण संहिता और हितों के टकराव (Conflict of Interest) जैसे गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।

सरकारी आवास का निजी फर्म के पते के रूप में उपयोग

मामले में यह दावा भी किया जा रहा है कि कुछ समय पहले विभागीय कार्रवाई के तहत नवनीत पाण्डेय को सेवा से बर्खास्त किया गया था। बाद में उन्होंने न्यायालय की शरण ली, जहां से उन्हें अंतरिम राहत प्राप्त हुई। हालांकि, मामले में अंतिम न्यायिक निर्णय अभी शेष है। अब सवाल यह है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी स्वयं या अपने परिजनों के माध्यम से सरकारी ठेकेदारी से जुड़ा पाया जाता है, तो क्या यह नियमों के अनुरूप है? क्या सरकारी आवास का निजी फर्म के पते के रूप में उपयोग किया जा सकता है। और यदि ऐसा हुआ है, तो संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की।

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संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया नहीं आई

फिलहाल इन आरोपों पर श्रम निरीक्षक नवनीत पाण्डेय अथवा संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना और सक्षम एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच किया जाना आवश्यक है। अब निगाहें जिला प्रशासन और श्रम विभाग पर हैं। क्या इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी क्या दस्तावेजों की पड़ताल कर सच्चाई सामने लाई जाएगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा इस पूरे मामले पर हमारी नजर लगातार बनी रहेगी।

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