हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर के बहुचर्चित पार्वती बाई कनाड़िया भूमि मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। करोड़ों की बेशकीमती जमीन को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में अब वकीलों ने ही कथित भू माफिया से दूरी बना ली है। बताया जा रहा है कि कनाड़िया क्षेत्र स्थित खसरा क्रमांक 44 की तीन हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर पिछले कई दशकों से विवाद चल रहा है। यह जमीन इंदौर बायपास पर Phoenix Citadel Mall के पीछे स्थित है और इसकी कीमत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जा रही है।
मामला फिलहाल मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित है। जानकारी के अनुसार, दो पक्षों के बीच समझौते के जरिए जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश की गई थी। पिछली सुनवाई में समझौता पेश करने की बात कही गई, लेकिन उसके विपरीत एक पक्ष ने मुकदमा वापस लेने के लिए आवेदन लगा दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मुकदमा वापस लेने वाले पक्ष के अधिवक्ताओं ने खुद को केस से अलग कर लिया। उन्होंने अदालत के सामने साफ कहा कि वे किसी भी साजिश या न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का हिस्सा नहीं बन सकते।
राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक, इस जमीन पर पहले पार्वती बाई के कथित वारिसों ने दावा किया था, लेकिन तहसीलदार ने सभी दावे खारिज करते हुए रजिस्ट्रार को जमीन के हस्तांतरण पर रोक लगाने के लिए पत्र लिखा था। राजस्व न्यायालय से राहत नहीं मिलने पर कथित भू माफियाओं ने सिविल कोर्ट का रुख किया और समझौते के आधार पर डिग्रियां हासिल कर लीं। अब इसी तरह का प्रयास उच्च न्यायालय में द्वितीय अपील क्रमांक 2966/23 में किए जाने की बात सामने आई है।
इसी बीच एक अन्य पक्ष ने कलेक्टर के समक्ष इस जमीन को अपने ट्रस्ट के नाम आवंटित करने का आवेदन दिया है। वहीं, एक जनहित याचिका में यह मांग की गई है कि भूमि को लावारिस मानकर सरकार अपने अधीन ले। मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से चार हफ्तों के भीतर इस भूमि की स्थिति और स्वामित्व को लेकर विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है। अब सबकी नजर सरकार के जवाब और अदालत के अगले रुख पर टिकी है।

