अनमोल मिश्रा, सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले से जालसाजी और सनसनीखेज धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। यहां एक कलयुगी भतीजे ने अपने सगे 85 वर्षीय जिंदा चाचा को सरकारी दस्तावेजों में ‘मृत’ घोषित करवा दिया। इतना ही नहीं चाचा के तीन बेटे होने के बावजूद उन्हें ‘बेऔलाद’ बताकर पटवारी की मदद से उनकी पुश्तैनी जमीन हड़प ली और औने-पौने दामों में बेच भी दी। इस महाघोटाले में नगर निगम अमले, स्थानीय पार्षद और पटवारी की मिलीभगत सामने आई है।
कौन हैं पीड़ित और क्या है जायदाद?
शहर के कामता टोला के रहने वाले 85 वर्षीय ईश्वरदीन सोनी रेलवे के सेवानिवृत्त (Retired) कर्मचारी हैं। उनकी कोठी क्षेत्र में 0.1680 हेक्टेयर की कीमती पुश्तैनी जमीन है। इसी बेशकीमती जमीन पर उनकी नजर थी जो उनके सगे भतीजे रामकरण सोनी की नीयत बिगड़ने का कारण बनी।
साजिश का पूरा ‘क्राइम ग्राफ’: कैसे जिंदा व्यक्ति बन गया मुर्दा?
इस पूरे खेल को बड़ी ही चालाकी से अंजाम दिया गया, जिसमें सरकारी तंत्र के भ्रष्ट चेहरों का भरपूर इस्तेमाल हुआ। भतीजे रामकरण सोनी ने जून 2024 में नगर निगम में आवेदन देकर दावा किया कि उसके चाचा की लंबी बीमारी से मौत हो गई है। नगर निगम के सफाई दरोगा ने बिना जांच किए पड़ोसी सुरेश, चंगेलाल, रामविकास, तेजभान और रिश्तेदार सीताशरण सोनी की झूठी गवाही पर मौत को प्रमाणित कर दिया।
वार्ड क्रमांक 43 के पार्षद सौरव मलिक गोल्डी ने भी आंखें मूंदकर एक प्रमाण पत्र और पंचनामा जारी कर दिया, जिसमें लिखा कि 18 जुलाई 2015 को ही ईश्वरदीन सोनी की मृत्यु हो चुकी है। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तहसीलदार रघुराजनगर ने बकायदा मृत्यु पंजीयन का आदेश जारी कर दिया।
पटवारी ने बदला ‘शजरा’, खुद की पत्नी के नाम करा ली रजिस्ट्री
मृत्यु प्रमाण पत्र हाथ में आते ही असली खेल शुरू हुआ। हल्का पटवारी प्रवीण सिंह इस साजिश में शामिल हुआ। पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में ईश्वरदीन को न सिर्फ मृतक दिखाया, बल्कि उन्हें निःसंतान घोषित कर भतीजों को उनका वारिस बना दिया। जमीन भतीजों के नाम होते ही, पटवारी प्रवीण सिंह ने पद का दुरुपयोग करते हुए वह जमीन महज 9 लाख रुपए में अपनी पत्नी माधवी सिंह के नाम पर रजिस्ट्री करवा ली।
बेटे की शिकायत पर खुला राज, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
वास्तविकता यह है कि बुजुर्ग ईश्वरदीन सोनी न सिर्फ पूरी तरह जीवित हैं, बल्कि उनके तीन बेटे भी हैं। जब इस धोखाधड़ी की भनक ईश्वरदीन के बेटे राजेश सोनी को लगी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। राजेश ने तुरंत मामले के सारे सबूत जुटाकर कलेक्टर, सिटी कोतवाली और कोठी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

प्रशासनिक एक्शन, जल्द हो सकती है दोषियों पर कार्रवाई
मामला उजागर होते ही सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस. ने इसे गंभीरता से लिया है और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। इस साजिश में शामिल पटवारी, पार्षद और अन्य दोषियों पर जल्द ही गाज गिरना तय माना जा रहा है।

