कुंदन कुमार/पटना। बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लेकर सरकार के तमाम दावों के बीच, राजधानी पटना से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य के मुख्यमंत्री आवास के अति सुरक्षित जोन के पास शराब की 10 खाली बोतलें बरामद की गई हैं। यह इलाका राज्य का सबसे हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं।
कैसे हुआ खुलासा?
स्थानीय लोगों की सूचना पर जब सचिवालय थाना की पुलिस मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा हैरान करने वाला था। वहां शराब की 10 खाली बोतलें मिलीं। इनमें से एक बोतल सड़क पर खुली अवस्था में पड़ी थी, जबकि बाकी 9 बोतलों को अखबार में लपेटकर एक कपड़े के थैले में छिपाकर रखा गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये सभी बोतलें महंगी ब्रांड की हैं, जिनकी बाजार में कीमत 4 हजार से 5 हजार रुपये प्रति बोतल के बीच है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिवालय थाना प्रभारी गौतम कुमार ने अपनी टीम के साथ पहुंचकर सभी बोतलों को अपने कब्जे में ले लिया। थाना प्रभारी ने कहा कि फिलहाल मामले की जांच की जा रही है कि ये बोतलें यहां तक कैसे पहुंचीं और इसके पीछे किसका हाथ है।
शराबबंदी के 10 साल: आंकड़ों की जुबानी
बिहार में शराबबंदी कानून को लागू हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। हाल ही में आबकारी विभाग का जिम्मा संभालते हुए डिप्टी सीएम विजेंद्र यादव ने जो आंकड़े जारी किए, वे चौंकाने वाले हैं। 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2026 तक, यानी पिछले 10 वर्षों में राज्य में शराबबंदी कानून के तहत कुल 11 लाख 37 हजार 731 मामले दर्ज किए गए हैं। इस दौरान सरकार ने 17 लाख 18 हजार 58 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि प्रशासन इस कानून को जमीन पर उतारने के लिए लगातार बड़ी कार्रवाई कर रहा है।
तकनीक के जरिए तस्करी पर प्रहार
तस्करी के नए तौर-तरीकों को भांपते हुए सरकार ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। दुर्गम दियारा इलाकों और नदी क्षेत्रों की निगरानी के लिए 42 हाई-टेक ड्रोन और 12 स्पीड मोटर बोट को तैनात किया गया है। साथ ही, राज्यभर में 84 चेक पोस्ट बनाए गए हैं, जिनमें से 67 अंतर्राज्यीय सीमा पर स्थित हैं। ये सभी चेक पोस्ट सीसीटीवी कैमरों से लैस हैं ताकि तस्करी की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक जब्त की गई अवैध शराब का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा नष्ट किया जा चुका है।
बहरहाल, मुख्यमंत्री आवास के पास मिली इन बोतलों ने सुरक्षा घेरे और शराबबंदी की जमीनी हकीकत पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि पुलिस जांच में क्या निकलकर सामने आता है।

