जुबैर अंसारी/ सुपौल। जिले के रतनपुरा थाना क्षेत्र में शराब तस्करों की बेलगाम रफ्तार ने एक निर्दोष की जान ले ली। शराब माफियाओं द्वारा कुचले गए मृतक की पहचान जदयू नेता और किराना व्यवसायी मनोज कुमार के रूप में हुई है। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा है और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

​घटना का विवरण

​मिली जानकारी के अनुसार, मनोज कुमार अपनी पोती को स्कूल छोड़कर दुकान खोलने जा रहे थे। इसी बीच, भारत-नेपाल सीमा से अवैध शराब की बड़ी खेप लेकर सिमराही की ओर भाग रही एक तेज रफ्तार होंडा सिटी कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि इससे पहले कार एक ट्रैक्टर से टकराई, जिससे ट्रैक्टर का अगला पहिया तक टूट गया। गंभीर रूप से घायल मनोज कुमार को राघोपुर रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

​पुलिस कार्रवाई और बरामदगी

​सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घेराबंदी की और दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि एक आरोपी मौके का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा। तस्करों की कार से लगभग 1050 बोतल नेपाली देसी शराब बरामद की गई है। पुलिस फिलहाल फरार आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है।

​सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

​इस घटना ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी के दावों की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी (SSB) की 45वीं बटालियन की कड़ी निगरानी के बावजूद तस्कर शराब की खेप लेकर सीमा में कैसे दाखिल हुए? वहीं, बीरपुर थाना क्षेत्र से होकर करीब 20 किलोमीटर तक तस्कर बेखौफ होकर अपनी गाड़ी दौड़ाते रहे, लेकिन स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
​स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यदि बीरपुर पुलिस सक्रिय होती और तस्करों में कानून का डर होता, तो शायद आज एक बेगुनाह को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। क्या यह पुलिस की लापरवाही है या फिर शराब माफियाओं और पुलिस के बीच किसी तरह की मिलीभगत? इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। फिलहाल, क्षेत्र में बढ़ते अपराध और तस्करी को लेकर लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।