सुरेश पांडेय, सिंगरौली। जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग में पदस्थ एक बाबू को रीवा लोकायुक्त पुलिस ने 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से जिला प्रशासन और कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया है।

​क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, देवसर परियोजना कार्यालय में चपरासी के पद पर कार्यरत श्रवण तिवारी ने अपने इंक्रीमेंट के भुगतान के लिए फाइल आगे बढ़ाने का आग्रह किया था। आरोप है कि विभाग में पदस्थ लिपिक (बाबू) मुन्नालाल वर्मा ने इंक्रीमेंट की फाइल पास करने और बकाया राशि के भुगतान के एवज में 7 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

​लोकायुक्त ने बिछाया जाल

रिश्वतखोरी से परेशान होकर पीड़ित श्रवण तिवारी ने 25 मई को रीवा लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले को गंभीरता से लिया और एक योजना तैयार की। आज दोपहर जैसे ही आरोपी मुन्नालाल वर्मा ने एनटीपीसी के यमुना भवन स्थित कार्यालय में रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपये लिए, पहले से ही घात लगाए बैठी लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।

​प्रशासनिक महकमे में खलबली

लोकायुक्त पुलिस द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई से विभाग के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। वर्तमान में आरोपी बाबू से पूछताछ की जा रही है और लोकायुक्त की टीम मामले से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच में जुटी है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के मुद्दे को हवा दे दी है।

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