A gentle tongue is a tree of life… No cap यह लेख पूरी तरह अपने Gen Z की vibe में explain कर रहा हूं ताकि बात straight hits different लगे और बात पूरी तरह से मेरे नन्हें Gen Z दोस्तों की समझ में आए। दोस्तों आज का डिजिटल era full-on lit है OTT, stand-up और reels का ऐसा fire content चल रहा है कि मैं भी उसका stan बन चुका हूं। फिर भी low-key एक issue है कि इस content में जो भाषा use हो रही है वो कई बार cringe और downright disrespectful हो जाती है।
Freedom of expression के नाम पर कुछ creators savage बनने की कोशिश में ऐसी बातें बोल रहे हैं, जो हमारी cultural vibe को बुरी तरह hurt कर रही है और High-key बोलें तो Indian culture में हमेशा wholesome communication का GOAT रहा है। जहां respect, संयम और मधुर वाणी ही real flex मानी जाती थी। आजकल कुछ content इतना sus है कि हमारे youths unknowingly उसी को normal मानने लगे हैं। आज का यह trend थोड़ा dangerous होता जा रहा है क्योंकि इससे behavior और सोच दोनों में shift आ रहा है। यहां हमारी एक ancient truth भी slaps करता है।
“सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्। प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः॥”
इसका मतलब है सच बोलो लेकिन इस तरह नहीं कि hurt कर दे और झूठ तो कभी न बोलें। अब एक real talk सरकार और समाज को balanced approach लेना चाहिए लेकिन इसमें youth को भी woke होकर खुद decide करना होगा कि क्या consume करना है। हर viral चीज worth हो यह ज़रूरी नहीं, बस याद रखें इनमें से बहुत कुछ बस clout के लिए बनाई जाती है।
आज के समय में Parents का role बहुत major है उन्हें अपने बच्चों को guide करना होगा, वरना यह FOMO-driven digital life उन्हें real values से दूर करके रख देगी। आज जगह- जगह Gen Z का behavior थोड़ा delulu और extra भी दिख रहा है, वो है real life से disconnect होकर सिर्फ online persona में जीना। So, bet यही है कि content enjoy करो लेकिन अपनी roots को ghost मत करो। Because, संस्कृति ही हमारी real में character energy है।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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