लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के नए मुख्यालय भवन के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपदा के प्रति समय रहते सतर्कता, बेहतर तैयारी और जनजागरूकता से जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों का कार्य नहीं है, बल्कि इसे आम नागरिकों की जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा.
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‘सही जानकारी और संयम कई लोगों की जान बचा सकता है’
मुख्यमंत्री ने कहा कि बचपन से ही परिवार और विद्यालयों में आग लगने, भूकंप या अन्य आपदाओं के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी जाती रही है. उन्होंने कहा कि आपदा के समय घबराहट और असामान्य व्यवहार नुकसान को बढ़ा देता है, जबकि सही जानकारी और संयम कई लोगों की जान बचा सकता है.
स्कूलों और कॉलेजों में आपदा प्रशिक्षण को बताया समय की जरूरत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब कोई आपदा नहीं हो रही हो, उसी समय प्रशिक्षण और तैयारियों पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए. उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों और शिक्षकों को नियमित रूप से आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह समाज और राष्ट्र की बड़ी सेवा है.
मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा घोषित करने वाला पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने बाढ़, बिजली गिरने, अतिवृष्टि और अग्निकांड जैसी प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी आपदा की श्रेणी में शामिल किया है. उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिससे पीड़ित परिवारों को राहत उपलब्ध कराई जा रही है.
उन्होंने बहराइच में मगरमच्छ के हमले में 12 वर्षीय बालक की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे हादसों के दौरान लोग बचाव कार्य करने के बजाय वीडियो बनाने में लग जाते हैं, जबकि प्राथमिकता जीवन बचाने की होनी चाहिए.
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111 मौतों का जिक्र कर बोले- समय पर चेतावनी से टाली जा सकती हैं कई जानें
मुख्यमंत्री ने हाल में खराब मौसम के कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों में 111 लोगों की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि समय पर चेतावनी और बेहतर समन्वय से ऐसी घटनाओं में होने वाली जनहानि को कम किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद एसडीएमए की बैठक बुलाकर अधिकारियों को अर्ली वार्निंग सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं.

