Jaipur Nagar Nigam Election: जयपुर नगर निगम चुनावों की घोषणा से पहले गुलाबी नगरी की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नवनिर्धारित परिसीमन के बाद तैयार हुए 150 वार्डों में आरक्षण की लॉटरी अभी बाकी है। सूत्रों के मुताबिक, स्वायत्त शासन विभाग 15 अगस्त से पहले आरक्षण लॉटरी निकाल सकता है। इसके बाद राज्य में निकाय चुनावों का औपचारिक ऐलान होने की उम्मीद है।

आरक्षण की इस लॉटरी पर भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय दावेदारों की नजर टिकी है। पिछले कई महीनों से अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क और प्रचार कर रहे संभावित उम्मीदवारों का चुनावी गणित आरक्षण की एक पर्ची से बदल सकता है।
किसका वार्ड रहेगा सुरक्षित, किसे बदलना पड़ेगा ठिकाना?
आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कई दावेदारों ने अपना प्लान-बी तैयार करना शुरू कर दिया है। अगर किसी मौजूदा दावेदार का वार्ड महिला, SC, ST या OBC श्रेणी के लिए आरक्षित हो जाता है, तो उसे दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की रणनीति बनानी पड़ सकती है। कई नेता अपने मौजूदा वार्ड के साथ-साथ आसपास के दूसरे वार्डों में भी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। ऐसे दावेदार आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अपनी रणनीति तय करेंगे।
150 वार्डों में संभावित आरक्षण का गणित
| श्रेणी | प्रस्तावित वार्ड |
|---|---|
| अनारक्षित (General) | 94 |
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) | 31 |
| अनुसूचित जाति (SC) | 20 |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 6 |
नियमानुसार सभी श्रेणियों में 33 प्रतिशत वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे। इस आधार पर जयपुर नगर निगम बोर्ड में कम से कम 50 महिला पार्षद चुने जाने की स्थिति बन सकती है।
एक वार्ड में 6 से 8 दावेदारों की दावेदारी
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल वार्डवार संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करने में जुटे हैं। कई प्रमुख वार्डों में एक पार्टी से ही 6 से 8 संभावित दावेदार सामने बताए जा रहे हैं। हालांकि, दोनों दल फिलहाल उम्मीदवारों को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। संगठन के वरिष्ठ नेता संभावित प्रत्याशियों की जमीनी सक्रियता, जनसंपर्क और जनता के बीच पकड़ पर नजर रख रहे हैं।
लॉटरी के बाद बदलेगी टिकट की तस्वीर
आरक्षण लॉटरी के बाद कई मौजूदा मजबूत दावेदार चुनावी दौड़ से बाहर हो सकते हैं। ऐसे में नए और युवा चेहरों के लिए टिकट की संभावनाएं बढ़ेंगी। फिलहाल जयपुर की स्थानीय राजनीति में सबसे बड़ा इंतजार आरक्षण की उस पर्ची का है, जो तय करेगी कि कौन अपने पुराने वार्ड से चुनावी मैदान में रहेगा और किसे नए वार्ड की तलाश करनी होगी।
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