लखनऊ. उत्तर प्रदेश में संदिग्ध दवाओं के बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा होने से स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) और लखनऊ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पता चला है कि राजस्थान से अवैध रूप से लाई जा रही संदिग्ध दवाओं को लखनऊ, गोंडा और अन्य जिलों में सप्लाई किया जा रहा था. मामले में कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
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अमीनाबाद से 21 लाख की दवाएं सील, 27 नमूने जांच के लिए भेजे गए
एफएसडीए की टीम ने अमीनाबाद स्थित एक अवैध गोदाम पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं बरामद कीं. मौके पर मौजूद व्यक्ति दवाओं की खरीद-बिक्री से जुड़े कोई वैध लाइसेंस या दस्तावेज पेश नहीं कर सका. कार्रवाई के दौरान करीब 21 लाख रुपये मूल्य की दवाओं को सील कर दिया गया, जबकि 27 दवाओं के नमूने राजकीय प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजे गए हैं.
बड़े ब्रांड जैसे नाम, लेकिन लेबल पर मिलीं गंभीर गड़बड़ियां
बरामद दवाओं में Telma, Pantop 40, Augmentin 625, Taxim, Zerodol-SP, Clavum 625, Chymoral Forte और अन्य प्रसिद्ध ब्रांडों से मिलते-जुलते नाम वाली दवाएं शामिल हैं. अधिकारियों के अनुसार, कई दवाओं के लेबल पर स्पेलिंग और पैकेजिंग संबंधी अनियमितताएं मिली हैं, जिससे इनके संदिग्ध या संभावित नकली होने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही होगी.
राजस्थान से जुड़े नेटवर्क की जांच तेज, रिपोर्ट के बाद होगी कड़ी कार्रवाई
जांच में यह भी सामने आया है कि गोंडा से करीब 1.30 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध नारकोटिक और अन्य औषधियां तथा बख्शी का तालाब क्षेत्र से भी लाखों रुपये की संदिग्ध दवाएं बरामद की गई हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के तार राजस्थान से जुड़े हैं. मामले में राजस्थान के भूपेंद्र शर्मा और गुर्जर नामक व्यक्ति सहित उत्तर प्रदेश के कई आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.
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एफएसडीए अधिकारियों ने बताया कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद यदि दवाएं नकली, मानकविहीन या कानून के विपरीत पाई जाती हैं, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.


