रामपुर. जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों के मानचित्र को लेकर उठे विवाद के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में भवन मानचित्रों के विनियमितीकरण(Regularization) को लेकर बड़ा निर्णय लिया है. शासन ने नया शासनादेश जारी करते हुए 1 अप्रैल 2026 तक जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत भवन मानचित्रों के मामलों के निस्तारण का रास्ता साफ कर दिया है. सरकार का कहना है कि इससे लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान होगा और क्षेत्राधिकार संबंधी विवाद कम होंगे.
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महायोजना के अनुरूप भवनों को मिलेगा लाभ
प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन पी. गुरु प्रसाद की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत मानचित्रों के कारण कई प्रशासनिक विसंगतियां सामने आई थीं. इन्हें दूर करने के लिए विशेष विनियमितीकरण व्यवस्था लागू की गई है. यदि भवन महायोजना और निर्धारित भू-उपयोग के अनुरूप बने हैं तो उन्हें नियमानुसार नियमित किया जाएगा. वहीं, जिन मामलों में भू-उपयोग परिवर्तन आवश्यक होगा, वहां निर्धारित शुल्क जमा कराकर प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
200 वर्गमीटर तक के आवासीय भूखंडों को बड़ी राहत
सरकार ने आम लोगों को राहत देते हुए 200 वर्गमीटर तक के आवासीय भूखंडों पर बने भवनों के लिए भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट देने का फैसला किया है. माना जा रहा है कि इससे छोटे आवासीय भवनों के मालिकों को सीधा लाभ मिलेगा और उनके भवनों के नियमितीकरण की प्रक्रिया आसान होगी.
सरकारी भूमि और जलाशयों पर बने निर्माण नहीं होंगे नियमित
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जलाशयों, महायोजना मार्गों और सरकारी भूमि पर किए गए निर्माणों का किसी भी स्थिति में विनियमितीकरण नहीं किया जाएगा. साथ ही जिला पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 1 अप्रैल 2026 तक स्वीकृत सभी मानचित्रों की प्रमाणित सूची 15 दिनों के भीतर संबंधित विकास प्राधिकरण और शासन को उपलब्ध कराएं. इसका उद्देश्य बैक डेट में मानचित्र स्वीकृत करने जैसी अनियमितताओं पर रोक लगाना है.
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सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से वास्तविक लाभार्थियों को राहत मिलेगी, जबकि अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन पर सख्ती जारी रहेगी.


