कुंदन कुमार, पटना। राज्य सरकार के मंत्री मदन साहनी ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ‘हिंदुस्तान आवाम मोर्चा’ (हम) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन द्वारा नीतीश कुमार को लेकर कही गई बातें 100 प्रतिशत सच हैं। मंत्री ने समर्थन जताते हुए कहा कि निश्चित तौर पर बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ कर दिया जाना चाहिए।

​नीतीश कुमार और नालंदा का योगदान

​मंत्री मदन साहनी ने अपने तर्क में कहा कि नीतीश कुमार ने जिस प्रकार बिहार के विकास के लिए अभूतपूर्व काम किए हैं, उन्हें देखते हुए यह कदम बेहद सराहनीय होगा। उन्होंने केवल बख्तियारपुर तक ही सीमित न रहते हुए यह भी मांग उठाई कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण नालंदा जिले का नाम भी उनके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम पर रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में राज्य को एक नई दिशा मिली है, इसलिए उनके योगदान को इस तरह से सम्मानित करना प्रासंगिक है।

​शराबबंदी पर सख्ती और जमीनी हकीकत

​बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी के सवाल पर मंत्री मदन साहनी ने स्पष्ट किया कि राज्य में कानून पूरी कड़ाई के साथ लागू है। उन्होंने याद दिलाया कि महिलाओं की विशेष मांग पर ही नीतीश कुमार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया था और सरकार ने इसके लिए कड़े कानून बनाए थे। हालांकि, उन्होंने व्यावहारिक पक्ष रखते हुए यह भी स्वीकार किया कि कोई भी कानून बनने के बाद शत-प्रतिशत अपनी आदर्श स्थिति में लागू हो जाए, ऐसा हमेशा संभव नहीं होता। इसके बावजूद, सरकार का यह स्पष्ट प्रयास है कि ज़मीन पर जितना प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए, वह पूरी ईमानदारी से किया जा रहा है और इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा रही है।

​’बाढ़ पीड़ितों की राहत और बचाव कार्य’

​बिहार में बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों पर बात करते हुए मदन साहनी ने कहा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए निरंतर और गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने वर्ष 2007 में आए भीषण कोसी प्रलय का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आपदा से निपटने के लिए जो बेहतरीन मॉडल तैयार किया था, वर्तमान सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
​उन्होंने बताया कि वर्तमान में भी बाढ़ पीड़ितों को फौरी तौर पर राहत पहुंचाई जा रही है और प्रशासन द्वारा कई जगहों पर राहत शिविर व केंद्र खोले गए हैं ताकि प्रभावित लोगों को भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि बिहार के लोगों को बाढ़ की विभीषिका से स्थायी तौर पर निजात कैसे मिले। इस दिशा में दूरगामी योजनाएं तैयार की जा रही हैं और भविष्य में भी बाढ़ नियंत्रण व प्रबंधन को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि आम जनता को राहत मिल सके।