मधुपुर (देवघर)। मधुपुर-गिरिडीह मार्ग पर सुग्गापहाड़ी गांव के पास चार नंबर रेलवे फाटक पर बन रहा फ्लाईओवर लोगों के लिए अब भी अधूरी राहत बना हुआ है। परियोजना का 70 प्रतिशत से अधिक काम पूरा होने के बावजूद फ्लाईओवर यातायात के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लोगों को रेलवे फाटक की पुरानी समस्या से निजात नहीं मिली है।

निर्माण की रफ्तार पर लगा ब्रेक

एनएच-114ए पर मधुपुर-गिरिडीह रेल मार्ग के ऊपर बन रहे इस फ्लाईओवर के निर्माण की शुरुआत में काम तेजी से आगे बढ़ा था। दोनों तरफ एप्रोच रोड और पिलर निर्माण का काम भी कराया गया। मुख्य हिस्से के निर्माण में भी काफी काम पूरा हो चुका है।लेकिन अब परियोजना के बचे हुए काम पर अड़चन बनी हुई है।

जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती

फ्लाईओवर के निर्माण में भूमि अधिग्रहण का मामला बड़ी बाधा बनकर सामने आया है। कुछ हिस्सों में जमीन से जुड़ी समस्या के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े विभागों के बीच अपेक्षित समन्वय नहीं होने से भी काम की गति पर असर पड़ा है।

रेलवे ट्रैक के ऊपर का हिस्सा अहम

फ्लाईओवर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रेलवे ट्रैक के ऊपर बनने वाला स्पैन और उससे जुड़ने वाली सड़कें हैं। परियोजना का 70 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा होने के बावजूद शेष कार्य पूरा नहीं होने के कारण पूरी संरचना का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

जिस मकसद से बना, वही अधूरा

चार नंबर रेलवे फाटक पर फ्लाईओवर बनाने का उद्देश्य रेलवे क्रॉसिंग के कारण होने वाली परेशानी को कम करना और मधुपुर-गिरिडीह मार्ग पर यातायात को सुगम बनाना है। फ्लाईओवर के पूरा होने से वाहनों को रेलवे फाटक पर ट्रेन गुजरने के दौरान रुकने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।लेकिन निर्माण में लगातार हो रही देरी के कारण परियोजना का मूल उद्देश्य फिलहाल पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।

लोगों को अब पूरा होने का इंतजार

करोड़ों रुपये की परियोजना में बड़ी मात्रा में काम पूरा होने के बाद अब लोगों की उम्मीद बाकी निर्माण कार्य के जल्द पूरा होने पर टिकी है। जमीन अधिग्रहण की समस्या और रेलवे-एनएच के बीच समन्वय की कमी दूर होने के बाद ही फ्लाईओवर के निर्माण में फिर तेजी आने की उम्मीद है।