शब्बीर अहमद, भोपाल। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और नाम जोड़ने की प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने प्रशासनिक अमले को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश के सभी 55 जिला कलेक्टर्स को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं कि यह पूरी तरह सुनिश्चित किया जाए कि मतदाता सूची से देश या प्रदेश का कोई भी पात्र मतदाता छूट न पाए।
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विशेष कैंप लगार युद्ध स्तर पर जारी है काम
राज्य के सभी 71,930 मतदान केंद्रों पर विशेष कैंप लगाकर युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी नागरिक को मतदाता सूची या आवेदन प्रक्रिया को लेकर कोई भी शिकायत या संदेह है, तो वे बिना किसी संकोच के अपने क्षेत्र के संबंधित 71,930 BLO, 532 AERO, 230 ERO या जिले के 55 DEO में से किसी से भी संपर्क कर सकते हैं। निर्वाचन आयोग यह पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में दर्ज हो।
दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ गरमाई सियासत
उधर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और कथित अनियमितताओं के विरोध में विपक्षी दलों द्वारा लगातार प्रदर्शन और मार्च निकाले जा रहे हैं। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर मुखर है, जिसके चलते दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और सियासी गहमागहमी का माहौल बना हुआ है।वहीं आज देश की राजधानी में पुलिस द्वारा सुप्रीम कोर्ट मार्च रोके जाने के कुछ ही घंटों बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के 11 प्रमुख नेताओं ने संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर दी। 12 अक्टूबर 2026 को शाम 4.37 बजे दायर इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में दर्ज कर लिया गया है।
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विपक्ष की इस संयुक्त याचिका में कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें प्राथमिक प्रतिवादी के रूप में भारतीय निर्वाचन आयोग को शामिल किया गया है, जबकि अन्य तीन प्रतिवादियों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के नाम दर्ज हैं। मामले की तात्कालिकता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि याचिका से जुड़ी औपचारिकताएं और प्रक्रियाएं आज ही पूरी की जाएं तथा किसी भी तकनीकी कमी को तत्काल दूर किया जाए। इसके चलते पूरी संभावना है कि मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले को अर्जेंट हियरिंग के लिए सूचीबद्ध कर सकती है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रसन्ना एस. पैरवी कर रहे हैं।
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