Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य के मदरसा और संस्कृत विद्यालयों की जांच कराने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने विभागीय अधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि नियमों के खिलाफ चल रहे किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाए। सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है।
बर्दाश्त नहीं होगा फर्जीवाड़ा- शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में किसी तरह की गड़बड़ी, फर्जीवाड़ा या भेदभाव बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार सभी शिक्षण संस्थानों को समान अवसर देने की नीति पर काम कर रही है। मंत्री के मुताबिक, मदरसों के विकास के साथ-साथ संस्कृत विद्यालयों को भी आधुनिक और मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
इन सभी विद्यालयों का होगा जांच
सरकार ने मदरसा बोर्ड और संस्कृत शिक्षा बोर्ड के तहत संचालित सभी विद्यालयों की जांच कराने का निर्णय लिया है। जांच में यह देखा जाएगा कि जिन संस्थानों को सरकारी सहायता और सुविधाएं मिल रही हैं, वे तय मानकों के अनुसार संचालित हो रहे हैं या नहीं। इसके तहत छात्रों की वास्तविक उपस्थिति, शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूलों की आधारभूत संरचना और शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी।
फर्जी संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कई जगहों से ऐसे विद्यालयों की शिकायतें मिली थीं, जहां कागजों पर छात्र और शिक्षक मौजूद हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग है। इसी के बाद सरकार ने यह कार्रवाई शुरू करने का फैसला लिया। मिथिलेश तिवारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद उसकी मंत्रालय स्तर पर समीक्षा होगी। अगर कोई संस्थान फर्जी या अवैध तरीके से चलता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऐसे विद्यालयों को बंद भी किया जा सकता है।
जिला स्तर पर विशेष टीमों का होगा गठन
सूत्रों के मुताबिक, जिला स्तर पर विशेष टीमों का गठन किया जाएगा जो स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेंगी। अधिकारियों को निष्पक्ष और गंभीरता के साथ जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग जल्द ही जांच प्रक्रिया को लेकर विस्तृत गाइडलाइन जारी कर सकता है।
सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी वर्ग विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। माना जा रहा है कि इस फैसले से फर्जी संस्थानों पर लगाम लगेगी और सही तरीके से चल रहे विद्यालयों को बेहतर संसाधन मिल सकेंगे।
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