पटना। ​बिहार के शिक्षा जगत में उस समय हड़कंप मच गया जब राजभवन ने मगध विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया। यह निर्णय विश्वविद्यालय में हुए कथित करोड़ों के घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद लिया गया है। राजभवन ने प्रो. शाही के स्थान पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर दिलीप कुमार केसरी को नया कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया है। आदेश के अनुसार, प्रो. दिलीप तब तक यह जिम्मेदारी संभालेंगे जब तक कि किसी नियमित कुलपति की नियुक्ति नहीं हो जाती या अगला आदेश जारी नहीं होता।

​भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की छाया

​प्रो. शाही के कार्यकाल पर उठे सवाल हालिया दिनों में काफी गंभीर हो गए थे। पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रो. शाही पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए थे। 13 मई 2026 को भेजे गए इस पत्र में दावा किया गया है कि अपने तीन साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान, कुलपति ने विश्वविद्यालय के कोष से लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की है। शिकायत में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि लोकधन की यह लूट बड़े पैमाने पर की गई, जिससे विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति चरमरा गई है।

​प्रिंटिंग प्रेस भुगतान और अन्य विवाद

​शिकायत पत्र में विशेष रूप से ‘चौधरी प्रिंटिंग प्रेस’ को किए गए 40 से 50 करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान का जिक्र किया गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इससे पहले भी कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राजभवन में शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने से मामला और गरमाता चला गया। मामला तब और चर्चा में आया जब ‘केवल सच’ पत्रिका के जनवरी 2026 के अंक में कुलपति पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमुखता से छापा गया। इसके अतिरिक्त, इस मामले को लेकर पटना उच्च न्यायालय में दो जनहित याचिकाएं (PIL) भी लंबित हैं।

​राजभवन का सख्त रुख

​राजभवन ने इस बदलाव के साथ ही नए कार्यवाहक कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केसरी के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्हें स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि वे कुलाधिपति (राज्यपाल) की पूर्वानुमति के बिना कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला नहीं लेंगे। राजभवन की इस त्वरित कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर अब कोई समझौता नहीं किया जाएगा। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार के शैक्षणिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और हर किसी की नजर अब जांच की दिशा और आने वाले नतीजों पर टिकी है।