कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन का केंद्र बन गई है। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE 4) की अधिसूचना जारी करने और परीक्षा तिथि घोषित करने की मांग को लेकर अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए हैं। दो दिनों से जारी यह प्रदर्शन अब और उग्र हो गया है, क्योंकि पुलिस की कार्रवाई और छात्र नेता दिलीप कुमार की गिरफ्तारी ने आग में घी डालने का काम किया है।
प्रदर्शन का कारण और छात्रों का रुख
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का मुख्य उद्देश्य TRE 4 को लेकर सरकार की चुप्पी को तोड़ना है। अभ्यर्थी लंबे समय से इस भर्ती प्रक्रिया के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से मिल रहे विरोधाभासी बयानों ने छात्रों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। छात्रों का कहना है कि शिक्षा विभाग के मंत्री द्वारा दिए जा रहे बयान केवल गुमराह करने वाले हैं, जिससे उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है।
दीपक पांडे ने सरकार को घेरा
’लल्लू राम न्यूज डॉट कॉम’ से विशेष बातचीत में छात्र नेता दीपक पांडे ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा, “यह कहां का न्याय है कि अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले छात्रों को सरकार प्रताड़ित कर रही है?” उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा बल प्रयोग और गिरफ्तारी से छात्र डरने वाले नहीं हैं। पांडे ने साफ कर दिया है कि जब तक TRE 4 की तिथि घोषित नहीं होती और गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगा।
छात्र नेता दिलीप कुमार की रिहाई की मांग
आंदोलन का एक मुख्य बिंदु छात्र नेता दिलीप कुमार की तत्काल रिहाई है। छात्रों का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज दबाने के लिए आंदोलन के मुख्य चेहरों को जेल में डाल रही है। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि यदि उन्हें जल्द रिहा नहीं किया गया, तो प्रदर्शन और भी व्यापक होगा। सरकार की दमनकारी नीति के बावजूद अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अडिग हैं और उन्होंने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
यह आंदोलन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बिहार के युवा शिक्षक अपनी नियुक्ति को लेकर कितने गंभीर हैं। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह छात्रों की मांगों पर विचार करती है या दमन का रास्ता अपनाती है। फिलहाल, पटना की सड़कों पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और अभ्यर्थी अपनी अगली रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।

