शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्यप्रदेश में महाकाल की नगरी उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान मस्जिद के हिस्से को हटाने को लेकर हुए हिंसक विवाद पर अखिल भारतीय साधु संत सन्यासी परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष महंत अनिलानंद महाराज का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस पूरी घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे उज्जैन को ‘तालिबान’ बनाने का प्रयास करार दिया है।
“सड़क सार्वजनिक संपत्ति है, किसी व्यक्ति विशेष की नहीं”
महंत अनिलानंद महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सड़क सार्वजनिक उपयोग के लिए होती है, यह किसी व्यक्ति विशेष या समुदाय की नहीं है। विकास कार्यों में सभी को सहयोग करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सड़क चौड़ीकरण के लिए हिंदू समाज ने बड़े दिल का परिचय देते हुए कई मंदिरों को हटाने की स्वीकृति दी, तो फिर दूसरे धर्म के लोगों को इस पर आपत्ति क्यों हो रही है? उन्होंने कहा कि ऐसा उग्र और हिंसक कृत्य दूसरे धर्म के उन लोगों का भी मनोबल तोड़ता है जो सौहार्द और कानून का पालन करना चाहते हैं।
“नेताओं ने भी तोड़े अपने निर्माण, फिर ऐसा विरोध क्यों?”
महंत अनिलानंद ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बड़े राजनेताओं तक ने सार्वजनिक हित और सड़क चौड़ीकरण के लिए अपने वैध निर्माणों को खुद तोड़ दिया है। ऐसे में कानून और विकास की प्रक्रिया का विरोध करना पूरी तरह अनुचित है।
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प्रशासन से सख्त एक्शन और तालिबानी सोच के दमन की मांग
साधु संत सन्यासी परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष ने प्रशासन से इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस प्रकार की ‘तालिबानी सोच’ को सख्ती से कुचलने और दमन करने का काम करना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ऐसी ताकतों के आगे झुकता है या दोहरा रवैया अपनाता है, तो भविष्य में हिंदू समाज भी अपने किसी धार्मिक स्थल को नहीं हटाने देगा।
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