० CBI जांच पर उठे सवाल, खाप पंचायतों ने कहा- जांच पूरी होने के बाद भी सच क्यों छिपाया जा रहा है

भिवानी। हरियाणा के बहुचर्चित मनीषा हत्याकांड में न्याय की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। भिवानी जिले के गांव ढाणी लक्ष्मण में रविवार को आयोजित महापंचायत में खाप प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सीबीआई व सरकार को 21 दिन का अल्टीमेटम दिया है। पंचायत ने साफ कहा कि यदि 28 जून तक मामले का खुलासा नहीं हुआ तो 29 जून से भिवानी लघु सचिवालय के सामने मृतका के पिता संजय आमरण अनशन पर बैठेंगे।

करीब पांच घंटे तक चली महापंचायत में विभिन्न खापों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने सवाल उठाया कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बावजूद 10 महीने बाद भी न तो किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई और न ही मौत की गुत्थी सुलझ पाई।

10 महीने बाद भी रहस्य बरकरार

गौरतलब है कि ढाणी लक्ष्मण गांव की 19 वर्षीय शिक्षिका मनीषा 11 अगस्त 2025 को अचानक लापता हो गई थी। दो दिन बाद 13 अगस्त को उसका शव खेतों में मिला था। शुरुआत में पुलिस ने इसे हत्या का मामला बताया, लेकिन बाद में कथित सुसाइड नोट मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद मामला और उलझ गया।

घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने हत्या की आशंका जताते हुए शव लेने से इनकार कर दिया था। बढ़ते विरोध के बीच लोहारू थाने के कर्मचारियों को निलंबित किया गया, तत्कालीन एसपी का तबादला हुआ और बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई। इसके बाद 21 अगस्त को मनीषा का अंतिम संस्कार किया गया।

CBI ने जांच पूरी कर ली, फिर भी नहीं हुआ खुलासा

महापंचायत को संबोधित करते हुए किसान नेता मेवा सिंह आर्य ने आरोप लगाया कि सीबीआई ने जांच पूरी कर ली है, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी का तबादला भी कर दिया गया है, जिससे लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “यदि जांच पूरी हो चुकी है तो सच सामने क्यों नहीं लाया जा रहा? आखिर आरोपियों पर कार्रवाई कब होगी?”

29 जून से डीसी कार्यालय के सामने धरना

मृतका के पिता संजय ने कहा कि वह पहले भी आमरण अनशन पर बैठना चाहते थे, लेकिन पंचायत के आग्रह पर रुक गए थे। अब यदि 21 दिनों के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती तो वे 29 जून से भिवानी डीसी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगे।

न्याय की लड़ाई फिर तेज

पिछले 10 महीनों में मनीषा केस को लेकर कई महापंचायतें, धरने, प्रदर्शन और भिवानी तक पैदल मार्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद मामले में कोई निर्णायक प्रगति नहीं होने से ग्रामीणों और खाप पंचायतों में भारी नाराजगी है। अब सबकी नजर 28 जून की समय सीमा पर टिकी है कि उससे पहले जांच एजेंसियां कोई बड़ा खुलासा करती हैं या फिर आंदोलन की नई शुरुआत होती है।