Maharana Raj Singh Statue: मेवाड़ में वीर महाराणा राज सिंह के नाम पर शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। पहले राणा राज सिंह मार्ग के नामकरण को लेकर विवाद हुआ, फिर नगर परिषद के तत्कालीन आयुक्त पर स्याही फेंकने की घटना ने मामले को तूल दिया।

अब राजसमंद के सबसे व्यस्त जल चक्की चौराहे पर रातोंरात महाराणा राज सिंह की प्रतिमा स्थापित किए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रतिमा स्थापना की तस्वीरें सामने आने के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया, अनुमति और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

बिना अंतिम अनुमति प्रतिमा लगाने पर विवाद

जानकारी के अनुसार, जल चक्की चौराहे पर महाराणा राज सिंह की प्रतिमा ऐसे समय में स्थापित कर दी गई, जब इस संबंध में अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति मिलने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। प्रतिमा रात के समय लगाए जाने के बाद इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं और मामला चर्चा का विषय बन गया। इस घटनाक्रम के बाद शहर में प्रशासनिक कार्रवाई और नियमों के पालन को लेकर बहस तेज हो गई है।

तत्कालीन आयुक्त ने पहले क्या कहा था?

नगर परिषद के तत्कालीन आयुक्त ललित सिंह देथा ने पहले कहा था कि प्रतिमा स्थापना के लिए अनुमति की फाइल भेजी गई है। यदि अंतिम मंजूरी नहीं मिलेगी तो प्रतिमा स्थापित नहीं की जाएगी, जबकि मंजूरी मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अब प्रतिमा लगाए जाने के बाद अनुमति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मौजूदा आयुक्त और कलेक्टर के बयान अलग-अलग

मामले पर नगर परिषद आयुक्त विजेश मंत्री ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और वे पूरे मामले की जानकारी ले रहे हैं। वहीं, जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने बताया कि नगर परिषद आयुक्त से बातचीत में उन्हें बताया गया कि प्रतिमा नगर परिषद की ओर से लगाई गई है। दोनों अधिकारियों के अलग-अलग बयान से पूरे मामले को लेकर और अधिक भ्रम की स्थिति बन गई है।

40 लाख की परियोजना भी विवादों में

नगर परिषद ने इस परियोजना के लिए करीब 40 लाख रुपये की योजना तैयार की थी। इसमें लगभग 25 लाख रुपये ग्रेनाइट की प्रतिमा और 15 लाख रुपये तिराहे के सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्तावित थे। आरोप है कि तकनीकी आपत्तियों और लंबित प्रशासनिक प्रक्रिया के बावजूद पहले आधार निर्माण कराया गया और बाद में प्रतिमा भी स्थापित कर दी गई।

टाउन प्लानिंग ने जताई थी आपत्ति

इस परियोजना पर पहले ही टाउन प्लानिंग विभाग ने आपत्ति दर्ज की थी। वरिष्ठ नगर नियोजक (उदयपुर जोन) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जल चक्की तिराहा कांकरोली और नाथद्वारा रोड का प्रमुख यातायात जंक्शन है। यहां प्रतिमा स्थापित होने से सड़क की चौड़ाई प्रभावित हो सकती है और यातायात पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में प्रतिमा के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन करने की सलाह भी दी गई थी। इसके अलावा नगरीय शासन विभाग के 1 मार्च 1997 के आदेश में भी ऐसे व्यस्त चौराहों और तिराहों पर प्रतिमा स्थापना से बचने का प्रावधान बताया गया है।

डिप्टी सीएम का शिलान्यास कार्यक्रम भी टला था

इस परियोजना को लेकर 6 मई को उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी का शिलान्यास कार्यक्रम प्रस्तावित था। विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी और अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण भी किया था। लेकिन आवश्यक प्रशासनिक मंजूरियां नहीं मिलने के कारण अंतिम समय में कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था।

अब प्रशासनिक जांच पर टिकी नजर

प्रतिमा लगाए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सभी आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।

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