Maharashtra Auto-Taxi Drivers Marathi Language Controversy: महाराष्ट्र के मुंबई में ऑटो और टैक्सी ड्राइवर्स के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ मराठी सीखना अनिवार्य करने के कारण ड्राइवर्स मराठी सीखने में व्यस्त हैं। इससे मुंबई में ऑटो-टैक्सी का शॉर्टेज हो गया है। लोगों को ऑटो और टैक्सी मिलने में काफी परेशानी हो रही है। ऑटो-टैक्सी के लिए लोगों को 40 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ा है।
वहीं दूसरी तरफ मुंबई में ऑटो और टैक्सी चालकों के एक गुट ने तीन-दिवसीय हड़ताल शुरू की है। ये मराठी भाषा की अनिवार्यता के नियम का विरोध कर रहे हैं। आरटीओ अधिकारी चालकों की मराठी भाषा की जानकारी जांच रहे हैं। वहीं चालकों का कहना है कि ट्रेनिंग में शामिल सवाल नहीं पूछे जा रहे हैं। मराठी सीखने के लिए भी पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
पूरे मामले पर टैक्सी चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने में कोई परेशानी नहीं है। उनका विरोध जांच के तरीके को लेकर है। उनका आरोप है कि आरटीओ अधिकारी ऐसे सवाल पूछ रहे हैं, जो उन्हें दी गई ट्रेनिंग में शामिल नहीं थे। चालकों का कहना है कि हम कम पढ़े-लिखे हैं। कुछ चालक तो बिल्कुल भी पढ़े-लिखे नहीं हैं। ऐसे लोगों के लिए कम समय में नई भाषा सीखना मुश्किल है। चालकों का यह भी कहना है कि मराठी की कक्षाओं में जाने से उनकी कमाई का नुकसान होता है। कई चालक रोज की कमाई पर निर्भर हैं। ऐसे में काम छोड़कर क्लास करना उनके लिए आसान नहीं है।
हम मराठी स्पेशलिस्ट नहीं, काम चलाने लायक मराठी सीखा रहेंः सीएम देवेंद्र फडणवीस
मामले में सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार हिंदी बोलने वाले लोगों को मराठी का स्पेशलिस्ट नहीं बनाना चाहती। चालकों को सिर्फ काम चलाने लायक मराठी आनी चाहिए। करीब 1.65 लाख चालकों को मराठी की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। उन्हें सर्टिफिकेट भी दिए गए हैं। वहीं परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि यह नियम अचानक नहीं बनाया गया है। व्यावहारिक मराठी का ज्ञान रखने की शर्त महाराष्ट्र में 1989 से मौजूद है। हालांकि इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था। अब 2026 में नियमों में बदलाव के बाद इसे लागू किया जा रहा है।
डेढ़ लाख ड्राइवर्स ने सीखी मराठी
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया कि करीब डेढ़ लाख चालक मराठी भाषा की कक्षाओं में शामिल होकर मराठी सीख चुके हैं। सरकार का उद्देश्य चालकों को व्यावसायिक कामकाज के लिए आवश्यक मराठी का ज्ञान देना है, न कि उनके लाइसेंस या बैज रद्द करना।

संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से मुलाकात की
वहीं शिवसेना के पूर्व सांसद संजय निरुपम ने राज्य में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए व्यावसायिक कामकाज में मराठी भाषा अनिवार्य करने के निर्णय के संबंध में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से मुलाकात की। संजय निरुपम ने मांग की है कि ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए दो से तीन महीने की अतिरिक्त समय-सीमा दी जाए। निरुपम ने कहा कि परिवहन विभाग द्वारा 12 अगस्त 2026 को जारी आदेश के अनुसार, नियमों का पालन न करने वाले चालकों को एक महीने का नोटिस दिया जाना अपेक्षित है।
सरकार ने यह नियम जारी किया है
दरअसल, मुंबई में 21 अगस्त से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के अधिकारी ऑटो और टैक्सी चालकों की मराठी भाषा की जानकारी जांच रहे हैं। यह जांच दक्षिण मुंबई से लेकर उपनगरों तक कई जगहों पर चल रही है। जिन चालकों को मराठी का कामचलाऊ ज्ञान नहीं है, उन्हें मेमो दिया जा रहा है। इसके बाद उन्हें मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय दिया जा रहा है। एक महीने बाद भी ड्राइवर जरूरी जानकारी नहीं दिखा पाता है, तो उसका बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। यह नियम ऑटो और टैक्सी के साथ ऐप आधारित कैब सर्विस के ड्राइवर्स पर भी लागू है।
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