पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने संसद की संयुक्त समिति के सामने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक बताया है. उन्होंने कहा कि एक देश, एक चुनाव के तहत पूरे देश में चुनाव कराने का प्रस्ताव बिना सोचे-समझे किया गया काम है. चिदंबरम ने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की कोशिश संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन है. उन्होंने इस पहल को ‘Monstrous’ करार दिया.

ये विधेयक दिसंबर 2024 में लोकसभा में पेश किए गए थे, जिसके बाद इन्हें विचार के लिए संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया था. 

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव का विरोध किया. उन्होंने ‘एक देश, एक चुनाव’ को असंवैधानिक और तर्कहीन बताया. संसदीय समिति के सामने कई सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि हर विधानसभा और संसद का कार्यकाल पांच साल के लिए होता है, इसलिए उसका कार्यकाल घटाना संविधान के मूल ढांचे का सीधा उल्लंघन है.

उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की इस पहल को ‘Monstrous’ करार दिया. पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार के पास इसे पारित कराने के लिए बहुमत नहीं है. उन्होंने इसे ‘असंवैधानिक’, ‘दोषपूर्ण’ और ‘तर्कहीन’ बताया.

TMC की समिति सदस्य सागरिका घोष ने भी विधेयक का विरोध करते हुए चुनाव आयोग पर यह आरोप लगाते हुए कहा कि इससे बेलगाम अधिकार मिल जाएंगे.

इन विधेयकों को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है.

आपको बताते चले कि संविधान लागू होने के बाद 1951 से 1967 तक लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए गए थे. 1968 और 1969 में कुछ राज्य विधानसभाएं समय से पहले भंग हो गईं, जिसके चलते एक साथ चुनाव कराने का चक्र टूट गया.

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