अमेरिका को युद्ध में ईरान को न हराने का खीझ तो है ही जिसकी भरपाई अब वह अलग अलग तरीकों से करने में लगा हुआ है. अमेरिका अब अपनी आर्थिक ताकत की चाल को चलते हुए ईरान को मदद कर रहे देशों को घेरने की तैयारी में है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार देर रात घोषणा की है कि ट्रम्प प्रशासन ने ईरान को पूरी तरह से अलग-थलग करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है.
अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा से पहले उसे ‘आर्थिक डी-डे’ की चेतावनी दी है, साथ ही ईरान से व्यापार करने वाले देशों को भी आगाह किया है.
अमेरिका की ओर से नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा से पहले अमेरिका और ईरान के बीच तीखे बयानों का दौर जारी है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चल रहे संघर्ष और युद्ध के प्रभावों के बीच एक ऐतिहासिक वित्तीय हमले के तहत ईरान और उसके विदेशी सहयोगियों को लक्षित करते हुए एक बड़े आर्थिक प्रतिबंध पैकेज की घोषणा की. इस अभियान को ‘आर्थिक डी-डे’ (Economic D-Day) नाम दिया गया है.
अमेरिकी वित्त मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के उन सभी नेटवर्क और रास्तों को चिन्हित कर लिया है, जिनके जरिए तेहरान कच्चे तेल की तस्करी करता है, फंड हासिल करता है.
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बात दोहराते हुए कहा कि दुनिया को यह समझना चाहिए कि हमारा मकसद ईरान की उस हर आर्थिक जीवन-रेखा को काटना है जो उसके दमनकारी शासन को बनाए रखती है, ताकि तेहरान अकेला पड़ जाए.

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने आर्थिक कार्रवाई का जवाब कठोर सैन्य बल से दिया तो ट्रंप तेजी से और निर्णायक रूप से जवाब देंगे. ट्रंप ने ही पिछले हफ्ते ईरान के खिलाफ इकोनॉमिक डी-डे की धमकी दी थी.
वहीं, दूसरी तरफ ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई ने सोमवार को अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह ईरान के खिलाफ “आर्थिक युद्ध” जारी रखता है तो तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी के अन्य हिस्सों से तेल निर्यात पूरी तरह रोक सकता है.
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