TATA Controversy: महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को नोटिस जारी किया (Maharashtra Charity Commissioner issue notice to Tata Trusts) है। चैरिटी कमिश्नर ने Tata Trusts से 12 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने ट्रस्ट्स के गवर्नेंस पर गंभीर सवाल उठाए थे। ने 24 सितंबर को वेणु श्रीनिवासन ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में गड़बड़ियों के आरोप वाली शिकायत की थी। इसपर अब महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को नोटिस जारी किया है।
बता दें कि टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमेन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) और टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के चेयरमेन नोएल टाटा (Noel Tata) के बीच पावर को लेकर पिछले कई महीने से कोल्ड वॉर चल रहा है। नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन को दोबारा टाटा संस का चेयरमेन बनाने पर आपत्ति जताई है।
हालांकि मामले में उस समय नया ट्विस्ट आ गया, जब एन चंद्रशेखरन और नोएल टाटा की लड़ाई में टाटा ट्रस्ट्स के जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन (venu srinivasan) कुद पड़े हैं। वेणु श्रीनिवासन ने एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को सही करार देते हुए (Tata Trusts) के चेयरमेन नोएल टाटा (Noel Tata) पर ही आरोपों की बौछार कर दी। सर रतन टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी और टाटा संस बोर्ड में उनके जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से ट्रस्ट के एडमिनिस्ट्रेशन और गवर्नेंस की तुरंत जांच करने की मांग कर डाली थी। उन्होंने गंभीर गवर्नेंस खामियों का आरोप लगाया है। साथ ही टाटा संस के मामलों में चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके ट्रस्टियों की भागीदारी पर चिंता जताई थी।
समाजसेवा से भटककर बिजनेस फैसलों में दखल देने का लगाया आरोप
श्रीनिवासन के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स अब समाजसेवा के अपने मुख्य काम से भटककर कंपनियों के बिजनेस फैसलों में दखल दे रहा है। ट्रस्टी खुद बड़े कारोबारी सौदों को तय करने, बातचीत करने और उन्हें फाइनल कराने में लगे हैं, जो कि चैरिटी ट्रस्ट के नियमों के खिलाफ है। श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक नोएल टाटा कुछ खास फैसलों से खुद को अलग रखें। इनमें टाटा संस की आम बैठकों के लिए प्रतिनिधि नामित करना और कंपनी के बोर्ड में आर्टिकल 121 से जुड़े मामलों पर वोट करना शामिल है। उन्होंने जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की बैठकें, सर्कुलर प्रस्ताव और बोर्ड में बदलाव रोकने की मांग भी की है।
किन चीजों को लेकर है तनाव
यह घटना चैरिटेबल ट्रस्ट्स के बीच गवर्नेंस और टाटा संस के बड़े शेयरहोल्डर के तौर पर श्रीनिवासन की भूमिका को लेकर बढ़ते तनाव को दिखाती है। टाटा ट्रस्ट्स के पास ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस की 66% हिस्सेदारी है। इसमें से, SDTT के पास टाटा संस में 27.98% और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के पास 23.56% हिस्सेदारी है, जो कुल मिलाकर 51.54% होती है।
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