TATA Controversy: टाटा ग्रुप (Tata Group) में लीडरशिप और गवर्नेंस को लेकर बवाल जारी है। टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमेन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) और टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के चेयरमेन नोएल टाटा (Noel Tata) की लड़ाई में टाटा ट्रस्ट्स के जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन (venu srinivasan) कुद पड़े हैं। सर रतन टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी और टाटा संस बोर्ड में उनके जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से ट्रस्ट के एडमिनिस्ट्रेशन और गवर्नेंस की तुरंत जांच करने की मांग की है। उन्होंने गंभीर गवर्नेंस खामियों का आरोप लगाया है। साथ ही टाटा संस के मामलों में चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके ट्रस्टियों की भागीदारी पर चिंता जताई। वेणु श्रीनिवासन ने सवाल उठाया कि नोएल टाटा चेयरमैन बने रहने के साथ-साथ ग्रुप की मुख्य ऑपरेटिंग होल्डिंग कंपनी ‘टाटा संस’ के मामलों में कैसे शामिल हो सकते हैं।

श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को चिट्ठी लिखकर नोएल को हमेशा के लिए ट्रस्टी और चेयरमैन बनाए रखने पर आपत्ति जताई है। इसके अलावा, उन्होंने नोएल के बेटे नेविल टाटा को ट्रस्टी बनाए जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं।

श्रीनिवासन के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स अब समाजसेवा के अपने मुख्य काम से भटककर कंपनियों के बिजनेस फैसलों में दखल दे रहा है। ट्रस्टी खुद बड़े कारोबारी सौदों को तय करने, बातचीत करने और उन्हें फाइनल कराने में लगे हैं, जो कि चैरिटी ट्रस्ट के नियमों के खिलाफ है। श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक नोएल टाटा कुछ खास फैसलों से खुद को अलग रखें। इनमें टाटा संस की आम बैठकों के लिए प्रतिनिधि नामित करना और कंपनी के बोर्ड में आर्टिकल 121 से जुड़े मामलों पर वोट करना शामिल है। उन्होंने जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की बैठकें, सर्कुलर प्रस्ताव और बोर्ड में बदलाव रोकने की मांग भी की है।

वेणु श्रीनिवासन ने अपनी शिकायत में तीन प्रमुख मुद्दे उठाए

  • पहला- नोएल टाटा को स्थायी ट्रस्टी बनाने और टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन बनाए जाने का आधार क्या है?
  • दूसरा- नवंबर 2025 में नेविल टाटा को ट्रस्टी नियुक्त करने की प्रक्रिया में उन्हें शामिल क्यों नहीं किया गया?
  • तीसरा- टाटा ट्रस्ट्स की ओर से टाटा संस के कारोबारी फैसलों में भूमिका निभाने का औचित्य क्या है?

किन चीजों को लेकर है तनाव

यह घटना चैरिटेबल ट्रस्ट्स के बीच गवर्नेंस और टाटा संस के बड़े शेयरहोल्डर के तौर पर श्रीनिवासन की भूमिका को लेकर बढ़ते तनाव को दिखाती है। टाटा ट्रस्ट्स के पास ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस की 66% हिस्सेदारी है। इसमें से, SDTT के पास टाटा संस में 27.98% और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के पास 23.56% हिस्सेदारी है, जो कुल मिलाकर 51.54% होती है।

श्रीनिवासन को वोट देने से रोकने की कोशिश

विवाद इतना गहरा गया कि ‘सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट’ ने वेणु श्रीनिवासन को टाटा संस की बोर्ड बैठकों में हिस्सा लेने और वोट डालने से रोकने का प्रयास किया। ट्रस्ट का तर्क था कि लिस्टिंग का समर्थन करना ट्रस्ट के रुख के उलट है, इसलिए श्रीनिवासन को ट्रस्ट की तरफ से वोट देने का हक नहीं होना चाहिए।

पहले भी चैरिटी कमिश्नर तक पहुंच चुका है मामला

टाटा ट्रस्ट्स में स्थायी ट्रस्टियों की नियुक्ति का विवाद कोई पहली बार नहीं है। टाटा ट्रस्ट्स में स्थायी ट्रस्टियों की नियुक्ति का विवाद पहले भी चैरिटी कमिश्नर तक पहुंच चुका है। अप्रैल 2026 में सर रतन टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में स्थायी ट्रस्टियों की संख्या को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मई में चैरिटी कमिश्नर ने सर रतन टाटा ट्रस्ट को बैठक करने और फैसले लेने से रोकने का आदेश दिया था। टाटा ट्रस्ट्स का पक्ष रहा है कि कानून में बदलाव भविष्य में होने वाली नियुक्तियों पर लागू होता है, पहले से नियुक्त स्थायी ट्रस्टियों पर नहीं।

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