Maharashtra Drought Crisis: महाराष्ट्र में सूखा संकट गंभीर होता जा रहा है। मानसून में बारिश नहीं होने के कारण महाराष्ट्र में 1972 के बाद सबसे बड़ा सूखा का सामना कर रहा है। पानी नहीं मिलने के कारण राज्य में 80 फीसदी फसलें तबाह हो चुकी हैं। खेतों में खड़ी फसलें सूख रही हैं। वहीं तालाब-कुएं खाली हो चुके हैं। जलाशयों में सिर्फ 12 फीसदी पानी बचा है। बारिश के सीजन में ही हालात यह हो गया है कि लोगों को पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र में, जिसमें जालना, बीड और लातूर जैसे सबसे अधिक प्रभावित जिले शामिल हैं।

मराठवाड़ा में स्थिति तो और भी दयनीय हो चुकी है। मराठवाड़ा में किसान मौत को गले लगा रहे हैं। छत्रपति संभाजीनगर और  जालना जिले में बूंद-बूंद पानी के लिए लोग तरसने लगे हैं।

महाराष्ट्र में सूखे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महाराष्ट्र के 358 में से 265 तालुकों (तहसीलों) को राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है, जो राज्य का लगभग 74% हिस्सा है। यह फ़ैसला जून और सितंबर 2026 के बीच 18.8% बारिश की कमी और लंबे समय तक सूखे के बाद लिया गया है, जिससे खेती के बड़े इलाकों में खरीफ़ की फ़सल बड़े पैमाने पर खराब हुई है। वहीं जिन खेतों और तालाबों में बारिश का पानी जमा होता था, आज वही सूखे पड़े हैं और सूखे की आहट मिलते ही टैंकर तैयार करने की भागदौड़ भी शुरू हो गई है। खंडाळा गांव में फटी हुई जमीन, सूख चुकी फूलगोभी की फसल, सूख चुके टमाटर के पौधे और पौधों पर लगे टमाटर भी पानी के अभाव में सूख चुके हैं। वैजापुर तालुका के खंडाळा गांव में किसानों के संघर्ष की यह रोज की कहानी बन चुकी है। मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों जैसे अंदरूनी इलाकों में बारिश की बहुत कमी हुई। कुछ जिलों में तो 50% से 60% तक की कमी दर्ज की गई है। जिससे सोयाबीन, कपास और अरहर जैसी ज़रूरी खरीफ फसलों को बहुत नुकसान हुआ।

राज्य में लगभग 18% कम बारिश हुई

बता दें कि महाराष्ट्र में 2026 का सूखा मुख्य रूप से मानसून में बारिश की बहुत ज़्यादा कमी, लंबे समय तक सूखा, और मौसम में बदलाव और मज़बूत एल नीनो घटना से जुड़े असामान्य मौसम पैटर्न की वजह से है। राज्य में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीज़न के दौरान कुल मिलाकर लगभग 18% बारिश की कमी दर्ज की गई, जिसमें सामान्य 970.9 mm की तुलना में 798.2 mm बारिश हुई। राज्य के बड़े हिस्सों में बारिश के बीच 40 से 60 दिनों तक लंबे समय तक सूखा पड़ा, खासकर बारिश पर निर्भर खेती वाले इलाकों में।

सूखे की चपेट में महाराष्ट्र का फेमस ‘अंगूर हब’

महाराष्ट्र के जालना का द्राक्ष हब और ‘द्राक्षों की पंढरी’ के नाम से पहचाना जाने वाला कडवंची गांव इस साल सूखे की मार झेल रहा है। पानी न होने से 1400 एकड़ में फैली अंगूर की बागें बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। किसानों ने बागों पर लाखों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन अब कुओं और खेत तालाबों में पानी कम होने से फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। जालना तालुका के कडवंची गांव में करीब 1300 से 1400 एकड़ क्षेत्र में द्राक्ष बागें हैं। गांव के ज्यादातर किसान द्राक्ष की खेती पर निर्भर हैं। यहां की द्राक्ष खरीदने के लिए महाराष्ट्र के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात से भी व्यापारी आते हैं।

SIR पर चुनाव आयोग में फूट! 10 महीने में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने फैसलों पर जताई नाराजगी, जानकारी के बिना निर्णय लेने का लगाया आरोप

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m