आसाराम केस के मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला को पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने ब्लैकमेलिंग की राशि से अब तक कुल 44 लाख रुपए बरामद किए हैं, जबकि मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
प्रवीण भारद्वाज, पानीपत। आसाराम बापू केस के पूर्व मुख्य गवाह महेंद्र चावला के खिलाफ चल रहे ब्लैकमेलिंग और करोड़ों की वसूली मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कुल 5 दिनों की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद शनिवार को आरोपी महेंद्र चावला को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। डीएसपी मुख्यालय सतीश वत्स ने बताया कि रिमांड के अंतिम दो दिनों के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ब्लैकमेल कर हड़पी गई राशि में से 10 लाख रुपए और बरामद किए हैं। इसके साथ ही इस पूरे प्रकरण में अब तक पुलिस कुल 44 लाख रुपए की नकदी बरामद करने में सफल रही है।
CCTV फुटेज और RTI के जरिए ब्लैकमेलिंग का खेल
पुलिस जांच के दौरान इस मामले में कई सनसनीखेज साक्ष्य सामने आए हैं। घटना से जुड़ा एक सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के हाथ लगा है, जिसमें महेंद्र चावला का भाई देवेंद्र, एक मध्यस्थ के घर से 70 लाख रुपए से भरा बैग ले जाता हुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा है। अदालत में दी गई दलीलों के अनुसार, महेंद्र चावला का पुराना इतिहास रहा है कि वह आरटीआई (RTI) लगाकर लोक सेवकों और रसूखदार लोगों को डराता था और फिर उनसे मोटी रकम वसूलता था। मौजूदा केस में उसने सनौली गांव के सरपंच संजय त्यागी से गवाही बदलने के नाम पर पहले 70 लाख रुपए हड़पे और फिर 80 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग शुरू कर दी, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस की शरण ली।
परिवार की संलिप्तता और फरार आरोपियों की तलाश
पुलिस की तफ्तीश में यह भी साफ हुआ है कि इस साजिश में महेंद्र की मां गोपाली देवी और उसका भतीजा भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता भगत सिंह के अनुसार, गोपाली देवी ने ही समझौते की बातचीत शुरू की थी और एक करोड़ रुपए की मांग रखी थी। महेंद्र ने पूर्व सरपंच सुरेंद्र शर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर में समझौते के लिए 101 रुपए के स्टाम्प पेपर पर साइन भी किए थे। फिलहाल, महेंद्र का भतीजा पुलिस की गिरफ्तारी के डर से अंडरग्राउंड हो गया है। पुलिस ने महेंद्र का मोबाइल फोन और कार जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दी है। अधिकारियों का कहना है कि फोन की जांच से ब्लैकमेलिंग के अन्य संभावित शिकार और डिजिटल सबूतों का खुलासा होने की उम्मीद है।

