सोनू वर्मा, नूंह। केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत किए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) के पारित न हो पाने को लेकर जिला नूंह (मेवात) के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में गहरा आक्रोश देखने को मिला। गांव किरा में बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्रित हुईं और उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए विपक्षी दलों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान महिलाओं ने प्रतीकात्मक रूप से पुतला फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल है। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं गुडिया माथुर, जया शर्मा और नीरज तंवर ने अपने संबोधन में कहा कि इस विधेयक के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण प्रस्तावित है, जिससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें नीति-निर्माण में उचित स्थान मिल सकेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में इस विधेयक को पारित होने से रोकने में विपक्षी दलों ने बाधाएं उत्पन्न कीं, जिसके चलते यह अहम कानून पारित नहीं हो सका। महिलाओं का कहना था कि संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 पर हुए मतदान में 298 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया, लेकिन आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह बिल अधूरा रह गया।

महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय

प्रदर्शनकारियों ने इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय करार देते हुए कहा कि यह स्थिति स्पष्ट करती है कि कुछ राजनीतिक दल महिला सशक्तिकरण के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने इसे महिला विरोधी मानसिकता का उदाहरण बताते हुए चेतावनी दी कि अब महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर चुप नहीं बैठेंगी और हर स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करेंगी।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए मांग उठाई कि इस विधेयक को जल्द ही पुनः संसद में लाया जाए और इसे पारित कराया जाए। प्रदर्शन के अंत में सभी महिलाओं ने एकजुट होकर महिला अधिकारों की रक्षा और उन्हें मजबूत करने के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया।