हरियाणा में अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच मंत्री महिपाल ढांडा ने गरीबों के घर तोड़ने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ सरकार का बुलडोजर अभियान तेज होने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी साफ कह चुके हैं कि अवैध कब्जे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन इसी बीच प्रदेश के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

महिपाल ढांडा ने साफ कहा कि “बने-बनाए घर नहीं तोड़ने चाहिए। मैं इसके पक्ष में नहीं हूं। उन्हें बनाने से पहले ही रोकना चाहिए था।” उन्होंने यह भी कहा कि एक गरीब व्यक्ति बड़ी मुश्किल से अपना घर बनाता है, लेकिन कार्रवाई के दौरान उसका घर तोड़ दिया जाता है, जबकि अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले कॉलोनाइजर बच निकलते हैं। ऐसे में कार्रवाई का फोकस गरीबों पर नहीं बल्कि अवैध कॉलोनियां बसाने वालों पर होना चाहिए।

ढांडा के इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकार के भीतर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग सोच है? एक तरफ सरकार अवैध कब्जों के खिलाफ सख्ती की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ मंत्री मानवीय पहलू को सामने रखकर कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ढांडा ने उस वर्ग की चिंता को आवाज दी है जो वर्षों से अवैध कॉलोनियों में रह रहा है और अब कार्रवाई की जद में आ सकता है। वहीं विपक्ष भी इस बयान को सरकार के भीतर मतभेद के तौर पर पेश करने की कोशिश कर सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार बुलडोजर अभियान को उसी सख्ती से आगे बढ़ाएगी या फिर महिपाल ढांडा द्वारा उठाए गए मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कोई अलग नीति सामने आएगी। फिलहाल इतना तय है कि मंत्री के एक बयान ने सरकार की कार्रवाई पर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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