चंडीगढ़: हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद दोबारा सेवा में रखे गए अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। सरकार को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव (Chief Secretary) अनुराग रस्तोगी के कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। इसी कड़ी में कार्रवाई करते हुए प्रशासनिक सुधार के तहत सचिवालय से 6 पुनर्नियुक्त कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवाओं से मुक्त (हटा) कर दिया गया है। हटाए गए कर्मचारियों में सज्जन सिंह, विपिन कुमार, हरीश चंद्र, हरेंद्रपाल, तरसेम सिंह और मुन्नी लाल सैनी शामिल हैं।
क्यों हो रही है यह कार्रवाई?
दरअसल, सरकार के पास यह गंभीर शिकायत पहुंची थी कि कई मंत्रियों और उच्च अधिकारियों के निजी स्टाफ में ऐसे लोग जमे हुए हैं, जो सरकारी सेवा से रिटायर हो चुके हैं, लेकिन पैरवी या संविदा (Contract) के आधार पर दोबारा कुर्सियों पर काबिज हैं। इस वजह से विभागों में नए और योग्य युवाओं को आगे आने और रोजगार का मौका नहीं मिल पा रहा था। इस प्रशासनिक विसंगति को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद संज्ञान लिया और सभी पुनर्नियुक्त कर्मियों का डेटा तलब करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव कार्यालय ने जारी किया कड़ा फरमान
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के कार्यालय की ओर से हरियाणा सिविल सचिवालय के सभी विभागों को एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। इस आदेश के तहत सचिवालय में कार्यरत सभी श्रेणियों (क्लास ए, बी, सी और डी) के उन अधिकारियों और कर्मचारियों की पूरी सूची मांगी गई है, जो सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा नियुक्त हुए हैं या वर्तमान में कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर सेवाएं दे रहे हैं। सभी विभागों को यह पूरी जानकारी एकत्र कर 15 जून 2026 तक हर हाल में मुख्य सचिव कार्यालय की ‘स्थापना-2’ शाखा को भेजने के आदेश दिए गए हैं।
सेक्टर-17 मिनी सचिवालय भी रडार पर, अधिकारियों को चेतावनी
सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, सिर्फ मुख्य सचिवालय ही नहीं, बल्कि चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित मिनी सचिवालय में भी रिटायरमेंट के बाद दोबारा मलाईदार पदों पर काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या काफी ज्यादा है। मुख्य सचिव कार्यालय के पत्र में सभी अतिरिक्त मुख्य सचिवों (ACS), प्रधान सचिवों, विशेष सचिवों, संयुक्त सचिवों और विभागाध्यक्षों (HODs) को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने अधीन आने वाले ऐसे सभी स्टाफ का पूरा रिकॉर्ड समय-सीमा के भीतर उपलब्ध करवाएं। पत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित तारीख तक जानकारी नहीं भेजी गई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित उच्च अधिकारी की तय की जाएगी।

