अमेरिका में अवैध तरीके से दाखिल होने के आरोप में फरवरी 2025 में 300 से अधिक भारतीयों को वापस भेजे जाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के जालंधर जोनल कार्यालय ने दिल्ली के टिकट एजेंट तरुण खोसला को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि वह डंकी रूट के जरिए लोगों को अवैध तरीके से अमेरिका भेजने वाले नेटवर्क का अहम हिस्सा था। विशेष पीएमएलए अदालत ने आरोपी को 30 अक्टूबर 2026 तक ED की हिरासत में भेज दिया है।
डंकी रूट नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, तरुण खोसला पर ऐसे नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है, जो कथित तौर पर लोगों को अवैध रास्तों से अमेरिका भेजने की व्यवस्था करता था। इस तरह के नेटवर्क में लोगों को विभिन्न देशों के रास्ते गंतव्य तक पहुंचाने का लालच दिया जाता है। मामले में एजेंटों की भूमिका और कथित वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। यह कार्रवाई फरवरी 2025 में अमेरिका से 300 से अधिक भारतीयों को वापस भेजे जाने के मामले से जुड़ी है। उस समय अवैध तरीके से अमेरिका में प्रवेश करने के आरोपों के बीच भारतीय नागरिकों को वापस भेजा गया था।
दक्षिण अमेरिकी देशों के लिए वीजा और टिकट की व्यवस्था
ED की जांच के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा के एजेंट कथित तौर पर लोगों के पासपोर्ट और रकम इकट्ठा करके खोसला को सौंपते थे। इसके बाद खोसला गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर और अल सल्वाडोर जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों तक पहुंचने के लिए वीजा और हवाई टिकटों की व्यवस्था करता था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन व्यवस्थाओं के जरिए लोगों को आगे अवैध और खतरनाक रास्तों से अमेरिकी सीमा तक पहुंचने में मदद की जाती थी।
निर्वासन के बाद शुरू हुई जांच
यह मामला फरवरी 2025 में अमेरिका से 300 से अधिक भारतीय नागरिकों को निर्वासित किए जाने के बाद जांच के दायरे में आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ये लोग मेक्सिको की सीमा के रास्ते अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल हुए थे। मामले में ED के जालंधर जोनल कार्यालय ने तरुण खोसला को गिरफ्तार किया है। विशेष PMLA अदालत ने उसे 30 अक्टूबर 2026 तक एजेंसी की हिरासत में भेजा है। जांच एजेंसी अब कथित नेटवर्क से जुड़े एजेंटों, वित्तीय लेनदेन और लोगों को विदेश भेजने की व्यवस्था में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। ED ने इस मामले में 9 जुलाई 2025 और 11 जुलाई 2025 को 19 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान जांच एजेंसी को कई दस्तावेज और डिजिटल उपकरण मिले थे।
मोबाइल से मिलीं आपत्तिजनक चैट
ED के मुताबिक, दिल्ली के टिकट एजेंट तरुण खोसला के जब्त मोबाइल फोन से कुछ आपत्तिजनक चैट मिली हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन चैट से संकेत मिलता है कि खोसला आव्रजन मंजूरी दिलाने के लिए बिचौलिए के तौर पर काम करता था। जांच में ‘ओके टू बोर्ड’ जैसी मंजूरी से जुड़े निर्देशों और एयरलाइन तथा आव्रजन अधिकारियों के साथ कथित समन्वय की जानकारी भी सामने आई है।
विदेशी संपर्कों से बातचीत के मिले सबूत
ED के मुताबिक, खोसला के जब्त मोबाइल फोन से मिली चैट में विदेशी संपर्कों के साथ बातचीत के साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि वह विदेशी हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन क्लीयरेंस, यात्रियों की व्यवस्था, टिकट बुकिंग और अमेरिकी डॉलर में भुगतान से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि खोसला फर्जी येलो फीवर टीकाकरण प्रमाणपत्र बनवाने और विदेशी एजेंटों के साथ समन्वय स्थापित करने में मदद करता था।
मेक्सिको और ब्राजील के संपर्कों की भी जांच
जांच एजेंसी के अनुसार, खोसला के मोबाइल फोन से मिली बातचीत में मेक्सिको में माइक और क्रिस्टी तथा ब्राजील में अली नाम के संपर्कों का भी उल्लेख मिला है। आरोप है कि ये संपर्क सीमाएं पार कराने वाले स्थानीय एजेंटों, जिन्हें डंकर कहा जाता है, और उनसे जुड़े भुगतान की व्यवस्था करते थे। ED का मानना है कि विदेशी संपर्कों के साथ कथित समन्वय इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
414 लेनदेन के जरिए जमा हुई रकम
ED की जांच के मुताबिक, बीजे इंटरनेशनल के बैंक खाते में तीन वित्त वर्षों के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी जमा हुई। कुल 414 लेनदेन के जरिए 30.38 करोड़ रुपये जमा किए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी अब इन लेनदेन के स्रोत, रकम जमा करने वालों और इसके संभावित इस्तेमाल की जांच कर रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि इन पैसों का संबंध उन गतिविधियों से हो सकता है, जिनके तहत लोगों को कथित तौर पर डंकी रूट के जरिए विदेश भेजने की व्यवस्था की जाती थी। हालांकि, नकदी जमा होने और कथित अवैध गतिविधियों के बीच संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
कई साल से संगठित तरीके से काम करने का आरोप
ED के अनुसार, कथित नेटवर्क कई वर्षों से संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें एजेंट और बिचौलिये विदेश जाने के इच्छुक लोगों को कानूनी रास्ते से भेजने का भरोसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे। इसके बाद वीजा, हवाई टिकट और अलग-अलग देशों के रास्ते यात्रा की व्यवस्था किए जाने का आरोप है। मामले में ED नकदी जमा होने के स्रोत, विदेशी संपर्कों के साथ कथित लेनदेन और नेटवर्क में शामिल अन्य एजेंटों व बिचौलियों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैंक खाते में जमा रकम का इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए किया गया था और क्या इसका संबंध कथित अवैध विदेश यात्रा नेटवर्क से था।
अल सल्वाडोर से मेक्सिको होते हुए अमेरिका पहुंचाने का आरोप
जांच में सामने आए एक रास्ते के अनुसार, लोगों को हवाई जहाज से अल सल्वाडोर ले जाया जाता था। वहां से सड़क मार्ग के जरिए मेक्सिको और फिर तिजुआना के रास्ते अमेरिकी सीमा तक पहुंचने की व्यवस्था की जाती थी। इस रास्ते के लिए प्रति व्यक्ति करीब 35 लाख से 40 लाख रुपये वसूले जाने का आरोप है।
गुयाना से कई देशों के रास्ते यात्रा
दूसरे रास्ते में लोगों को दुबई या अदीस अबाबा के रास्ते गुयाना पहुंचाने की व्यवस्था बताई गई है। इसके बाद ब्राजील, इक्वाडोर, कोलंबिया, पनामा के जंगलों, ग्वाटेमाला और मेक्सिको से होते हुए तिजुआना के रास्ते अमेरिका पहुंचने का कथित इंतजाम किया जाता था। इस रास्ते के लिए प्रति व्यक्ति लगभग 25 लाख से 30 लाख रुपये लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
तीसरे रास्ते में 12 देशों से होकर गुजरने का दावा
जांच से जुड़े विवरणों में तीसरे रास्ते का भी उल्लेख है। निर्वासित किए गए एक व्यक्ति के बयान के अनुसार, इस मार्ग में गुयाना, ब्राजील, बोलीविया, पेरू, कोलंबिया, पनामा, कोस्टा रिका, निकारागुआ, होंडुरास, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला और मेक्सिको से होते हुए अमेरिकी सीमा तक पहुंचने की व्यवस्था शामिल थी।
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